
इस मुद्दे को लेकर सत्तापक्ष और विपक्ष के सदस्यों के बीच तीखी बहस हुई। आसंदी ने कांग्रेस सदस्यों का स्थगन प्रस्ताव अस्वीकार कर दिया। इसके बाद कांग्रेसी सदस्य हंगामा करते हुए गर्भगृह में चले गए और स्वमेव निलंबित हो गए। हंगामे के बीच कार्यवाही को पांच मिनट के लिए स्थगित करना पड़ा।
गैस की कमी से जनता परेशान- महंत
चंद्राकर बोले- यह विधानसभा का विषय नहीं
स्थगन प्रस्ताव पर प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा के वरिष्ठ विधायक अजय चंद्राकर ने कहा कि गैस सिलेंडर की कीमत और महंगाई का विषय विधानसभा के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता, इसलिए इस मुद्दे पर सदन में चर्चा नहीं हो सकती। इस पर नेता प्रतिपक्ष डा. चरणदास महंत ने कहा कि अजय चंद्राकर के घर में तो खाना बन रहा है, लेकिन आम जनता परेशान है। यह भले ही केंद्र का विषय हो, लेकिन प्रदेश में कालाबाजारी हो रही है। लोग गैस सिलिंडर के लिए सड़कों पर लाइन में खड़े हैं।
विपक्ष ने कहा कि भले ही यह केंद्र का विषय है, लेकिन राज्य की जनता महंगाई से परेशान है, इसलिए इस पर चर्चा होनी चाहिए। चंद्राकर के बयान के बाद विपक्ष ने कड़ा विरोध दर्ज कराया। कांग्रेस विधायक व पूर्व मंत्री उमेश पटेल ने कहा कि जब मुख्यमंत्री का बयान गैस को लेकर सदन में आ सकता है, तो फिर इस मुद्दे पर चर्चा क्यों नहीं हो सकती। उन्होंने कहा कि जनता से जुड़े मुद्दों पर विधानसभा में चर्चा होना जरूरी है।
भूपेश बघेल ने राज्य सरकार की जिम्मेदारी बताई
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भी इस मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए कहा कि भले ही गैस का विषय केंद्र सरकार से जुड़ा हो, लेकिन प्रदेश में गैस की कमी और महंगाई का असर यहां की जनता पर पड़ रहा है, इसलिए व्यवस्था सुनिश्चित करना राज्य सरकार की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि व्यवसायिक गैस की आपूर्ति भी प्रभावित हो गई है। अभी शादी का सीजन चल रहा है और आज की स्थिति में बिना गैस के खाना बनाना संभव नहीं हैहम सभी को गैस सिलेंडर की जरूरत होती है और इस समय सभी लोग चिंतित हैं। उन्होंने कहा कि इसका असर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की परिस्थितियों से भी जुड़ा हो सकता है, लेकिन हमें अपने राज्य की समस्या पर चर्चा करना चाहिए।