
अचानक हुई इस वृद्धि से आम जनता, किसानों, बिल्डरों और व्यापारियों की चिंता बढ़ गई है। विरोध बढ़ने पर कई जगह व्यापारिक संगठनों और नागरिकों ने प्रदर्शन भी किए हैं। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आश्वासन दिया कि अगर नई दरें आम लोगों को परेशान करती हैं, तो सरकार पुनर्विचार कर संशोधन कर सकती है।
जनता के हित में पुनर्विचार को तैयार सरकार
बढ़ते विरोध को देखते हुए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि जनता पर अनावश्यक बोझ नहीं डाला जाएगा। उन्होंने बताया कि 2017 के बाद पहली बार गाइडलाइन दरों को संशोधित किया गया है, जबकि नियम के अनुसार यह हर वर्ष अपडेट होना चाहिए।
जल्द हो सकता है बड़ा फैसला
गाइडलाइन दरों में बढ़ोतरी से स्टाम्प ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन शुल्क भी बढ़ जाते हैं, जिससे मध्यम वर्ग के लिए घर या जमीन खरीदना महंगा हो जाता है। बढ़ते दबाव को देखते हुए संकेत मिल रहे हैं कि सरकार जल्द ही गाइडलाइन दरों में राहत देने का बड़ा फैसला ले सकती है। इससे जनता में उम्मीद बढ़ी है कि आने वाले दिनों में जमीन की कीमतों में कुछ कमी देखने को मिल सकती है।
कारोबारी-विपक्ष लगातार कर रहा प्रदर्शन
गाइडलाइन वृद्धि के खिलाफ कारोबारी, कांग्रेस और आम आदमी पार्टी लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने कानून वापस नहीं लिया, तो प्रदेश में बड़ा आंदोलन किया जाएगा।