
सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर इस मामले को हाईकोर्ट में फिर से खोला गया है। इससे पहले हुई सुनवाई में हाईकोर्ट ने अंतिम सुनवाई के लिए 1 अप्रैल की तारीख तय की थी। बुधवार को हुई सुनवाई के दौरान डिवीजन बेंच में सतीश जग्गी, सीबीआई, राज्य सरकार और अमित जोगी के वकील मौजूद रहे।
बुधवार को केस की सुनवाई दौरान अमित जोगी के वकील ने कोर्ट को बताया कि उन्हें केस की फाइल उपलब्ध नहीं कराई गई है, इसलिए जवाब देने के लिए समय दिया जाए। हालांकि, हाईकोर्ट ने समय देने से इनकार कर दिया और सीबीआई के वकील को निर्देश दिया कि फाइल तुरंत उपलब्ध कराई जाए।
आज होगी अंतिम सुनवाई, CBI की जांच रिपोर्ट पर टिकी निगाहें
हाईकोर्ट ने कहा कि 24 घंटे के भीतर जवाब पेश किया जाए और गुरुवार को मामले की अंतिम सुनवाई की जाएगी। दरअसल पहले सीबीआई ने इस हत्याकांड में अमित जोगी के साथ ही 29 लोगों आरोपी बनाया था। उनमें से 28 को सजा मिली और 1 अभियुक्त अमित जोगी बाइज्जत बरी कर दिए गए थे। ऐसे में अब दोबारा केस खुलने के बाद सीबीआई की 11000 पन्नों की जांच रिपोर्ट पर निगाहें टिकी हुई है।
हत्याकांड के दोषियों की अपील खारिज
डिवीजन बेंच ने 2 साल पहले रामावतार जग्गी हत्याकांड के दोषियों की अपील को खारिज कर दिया था, जिसमें डिवीजन बेंच ने आजीवन कारावास की सजा को बरकरार रखा था। वहीं सुप्रीम कोर्ट ने CBI की अपील स्वीकार करते हुए मामला फिर से छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट भेजने का निर्देश दिया था, जिससे मामले की मेरिट पर विस्तार से सुनवाई हो सके।
हत्याकांड के बाद पुलिस की शुरूआती जांच में पक्षपात और असंतोष के आरोप लगने पर राज्य सरकार ने जांच CBI को सौंपी थी, तब CBI ने अपनी जांच में पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के बेटे अमित जोगी समेत कई लोगों पर हत्या और साजिश के आरोप लगाए थे।
हालांकि सबूतों के अभाव में अमित जोगी को बरी कर दिया गया था, लेकिन अब केस रिओपन होने के बाद कानूनी जानकारों का कहना है कि अमित जोगी को जमानत लेनी होगी।