छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले के ताड़मेटला नक्सली हमले में CRPF के 76 जवान हुए थे, छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की अपील खारिज करते हुए निचली अदालत के बरी करने के फैसले को बरकरार रखा

Chhattisgarh Crimesछत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले के ताड़मेटला नक्सली हमले में CRPF के 76 जवान हुए थे। जिसके सभी आरोपी दोषमुक्त हो गए हैं। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की अपील खारिज करते हुए निचली अदालत के बरी करने के फैसले को बरकरार रखा है।

चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने इस पर बेहद तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि, इतनी बड़ी शहादत के बावजूद अभियोजन एजेंसियां असली अपराधियों की पहचान करने और उन्हें न्याय के कटघरे में लाने में पूरी तरह विफल रही हैं। इस तरह हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के दोषमुक्ति के फैसले को सही ठहराया है।

डिवीजन बेंच ने अपने फैसले में कहा है कि, हमें यह देखकर अत्यंत दुख हुआ है। बड़े पैमाने पर जवान शहीद हुए और राष्ट्रीय सुरक्षा को गंभीर परिणाम भुगतने पड़े। इसके निपटारे में कोई भी कानूनी रूप से मान्य और विश्वसनीय साक्ष्य पेश नहीं किया जा सका। इसलिए निचली अदालत को उन्हें बरी करने के लिए विवश होना पड़ा।

जवानों पर हुए सामूहिक हमले के आरोपियों को प्रत्यक्ष साक्ष्यों की कमी, अपूर्ण परिस्थितिजन्य साक्ष्य, जांच में प्रक्रियात्मक खामियों और अपराध की गंभीरता के बावजूद उचित संदेह से परे दोष सिद्ध करने में विफलता के कारण बरी कर दिया गया।

जानिए क्या था मामला ?

6 अप्रैल 2010 की सुबह ताड़मेटला के जंगलों में नक्सलियों ने CRPF की 62वीं बटालियन पर घात लगाकर हमला किया था। इस भीषण नरसंहार में 75 CRPF जवान और राज्य पुलिस का 1 सदस्य शहीद हो गए थे। नक्सलियों ने जवानों के हथियार भी लूट लिए थे।

दंतेवाड़ा की निचली अदालत ने 2013 में ही साक्ष्यों के अभाव में आरोपियों को बरी कर दिया था, जिसे राज्य सरकार ने हाई कोर्ट में चुनौती दी थी।