CG-PSC-2003 के बहुचर्चित गड़बड़ी का मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया

Chhattisgarh CrimesCG-PSC-2003 के बहुचर्चित गड़बड़ी का मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है। सुप्रीम कोर्ट ने इस केस में सुलह कराने के लिए समझौते का रास्ता अपनाया है। मामले में याचिकाकर्ता वर्षा डोंगरे और चयनित उम्मीदवारों को सुप्रीम कोर्ट में आयोजित समाधान समारोह (विशेष लोक अदालत) में बुलाया गया है।

हालांकि, वर्षा डोंगरे का कहना है कि इस मामले में समझौते की कोई गुंजाइश नहीं है। उनका कहना है कि हाईकोर्ट पहले ही इस मामले में फैसला दे चुका है, इसलिए उसे लागू किया जाना चाहिए।

बतादें कि हाईकोर्ट ने 2017 में चयन सूची को रद्द करते हुए नए सिरे से मेरिट सूची बनाने और पदस्थापना का आदेश जारी किया था। इस पर अमल होने की स्थिति में आधा दर्जन डिप्टी कलेक्टर निचले पदों पर चले जाते, लेकिन मामला सुप्रीम कोर्ट में चला गया। तब से यह मामला लंबित है और चयनित उम्मीदवारों के पक्ष में स्टे पर केस चल रहा है।

साल 2003 में पीएससी द्वारा की गई गड़बड़ी दो साल तक छिपी रही। वर्ष 2005 में केंद्र सरकार ने सूचना का अधिकार कानून लागू किया। इसके बाद उम्मीदवार रविंद्र सिंह, वर्षा डोंगरे समेत अन्य ने आरटीआई के जरिए जानकारी मांगी। इसी आधार पर इन उम्मीदवारों ने वर्ष 2005 में गड़बड़ी को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।

हाईकोर्ट के नोटिस के बाद पीएससी ने वर्ष 2005 में ही स्वीकार कर लिया था कि चयन में उनसे गलती हुई है। ऐसे में 2016 तक मामला लटका रहा और 11 साल बाद हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ताओं के हक में फैसला सुनाया।

ऐसे हुआ मामला उजागर

वर्ष 2003 की परीक्षा का आरटीआई में मिले दस्तावेज में खुलासा हुआ कि एक पेज लिखने वाले उम्मीदवार को 60 में 55 अंक मिले हैं। उसी विषय में सभी जवाब लिखने वाले को 10 से 15 अंक मिले थे। स्केलिंग में भी नंबर बराबर होने के बाद भी एक ही विषय वालों के नंबर काफी बदल गए।

अपात्रों का चयन, हाईकोर्ट के फैसले से 147 अधिकारी सीधे प्रभावित हाईकोर्ट ने फैसले में आदेश दिया कि वर्ष 2003 पीएससी मेंस के सभी वैकल्पिक विषयों की री-स्केलिंग की जाए। साथ ही मानव विज्ञान के पेपर की जांच मापदंड के आधार पर हो। इस फैसले के बाद चयनित 147 अधिकारी सीधे प्रभावित हो रहे थे।

हाईकोर्ट के फैसले को डिप्टी कलेक्टर पद्मिनी भोई, संजय चंदन त्रिपाठी समेत आधा दर्जन से अधिक अधिकारियों ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे दी। प्रारंभिक सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगा दी। मामला सर्वोच्च न्यायालय में लंबित है।

पीएससी के जानकारों का कहना है कि री-स्केलिंग के बाद कुछ उम्मीदवार नए सिरे से मेरिट सूची में शामिल होते और कुछ बाहर हो जाते।

मुंगेली और कबीरधाम में उपस्थित होने नोटिस

वर्तमान में यह मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। अब सुप्रीम कोर्ट ने इस पुराने विवाद को आपसी सहमति से निपटाने के लिए इसे ”समाधान समारोह” में शामिल किया है।

वर्षा डोंगरे, छत्तीसगढ़ सरकार और प्रतिवादी निरुपमा लोनहरे सहित अन्य संबंधित पक्षों को मुंगेली और कबीरधाम के जिला विधिक सेवा प्राधिकरणों में उपस्थित होने के लिए नोटिस जारी किए गए हैं।

हालांकि, वर्षा डोंगरे ने इस केस में सुलह की गुंजाइश से इनकार किया है। उनका कहना है कि हाईकोर्ट ने उनके पक्ष में फैसला दे चुका है, अब फैसला सुप्रीम कोर्ट से ही होगा।

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