कुम्हारी अग्निकांड,मामले की जांच के लिए बनाई गई कमेटी ने अपनी रिपोर्ट तैयार कर कलेक्टर अभिजीत सिंह को सौंप दी

Chhattisgarh Crimesदुर्ग जिले के कुम्हारी स्थित खपरी गांव में 12 मई को हुए अग्निकांड में मासूम समेत 4 लोगों की मौत हो गई थी। इस मामले की जांच के लिए बनाई गई कमेटी ने अपनी रिपोर्ट तैयार कर कलेक्टर अभिजीत सिंह को सौंप दी है।

जांच रिपोर्ट में सामने आया कि घर में रखे गैस सिलेंडर के रेगुलेटर से गैस लीक होने के कारण आग लगी थी। गैस पूरे घर में फैलने के बाद किसी चिंगारी की वजह से झोपड़ी में आग भड़क गई और सिलेंडर ब्लास्ट हो गया।

वहीं घर के अंदर रखी डीजल की एक शीशी ने आग को और तेजी से फैलाने का काम किया। देखते ही देखते करीब 2 मिनट 47 सेकेंड के भीतर झोपड़ी में मौजूद चार लोगों की जान चली गई। जांच में यह भी पता चला कि अनिल वैष्णव 12 मई की सुबह ही सिलेंडर भरवाकर घर लाया था।

इससे पहले कई दिनों तक घर में गैस सिलेंडर नहीं था और परिवार चूल्हे पर खाना बना रहा था। सिलेंडर घर के अंदर रखने के बाद उसके रेगुलेटर से गैस रिसने लगी। आशंका है कि गैस फैलने के बाद किसी तरह चिंगारी उठी, जिससे झोपड़ी में आग लग गई।कलेक्टर अभिजीत सिंह ने बताया कि शुरुआती जांच में शॉर्ट सर्किट की आशंका जताई जा रही थी, लेकिन जांच रिपोर्ट में स्पष्ट हुआ है कि गैस रिसाव के कारण सिलेंडर ब्लास्ट हुआ। अब इसी रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

डीजल की शीशी से और भड़की आग

आग लगने के बाद घर के अंदर रखी डीजल की एक शीशी ने स्थिति को और भयावह बना दिया। जांच रिपोर्ट के मुताबिक डीजल की वजह से आग तेजी से फैल गई और कुछ ही मिनटों में पूरा घर उसकी चपेट में आ गया।

अंदर मौजूद लोग बाहर निकलने का मौका भी नहीं पा सके। इसी दौरान गैस सिलेंडर ब्लास्ट हो गया, जिससे आग ने विकराल रूप ले लिया। मामले की जांच के लिए गठित टीम की अध्यक्षता तहसीलदार रवि विश्वकर्मा को सौंपी गई थी।

जांच टीम में जिला सेनानी नगर सेना नागेंद्र सिंह, सीएमओ कुम्हारी नेतराम चंद्राकर, भिलाई-3 थाना टीआई अंबर सिंह, एफएसएल अधिकारी स्मीता भारदीय, मेडिकल ऑफिसर डॉ. अविनाश पाठक और सहायक अभियंता विजय कुमार बंजारे शामिल थे। तहसीलदार रवि विश्वकर्मा ने जांच पूरी कर रिपोर्ट कलेक्टर को सौंप दी है।

दोनों बेटियों के साथ नातिन की भी मौत

इस हादसे में अनिल वैष्णव, उसकी दोनों बेटियां लक्ष्मी, चांदनी और दो साल की नातिन गोपिका की जलकर मौत हो गई थी। घटना के बाद दुर्ग कलेक्टर अभिजीत सिंह ने पूरे मामले की जांच के आदेश दिए थे। जांच कमेटी को तीन दिन के भीतर रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए थे।

शुरुआत में आशंका जताई जा रही थी कि बिजली के खंभे में शॉर्ट सर्किट होने से आग लगी, लेकिन जांच में इसके कोई ठोस सबूत नहीं मिले। जांच टीम ने बिजली विभाग से जानकारी ली, जिसमें पता चला कि 1 मई से 12 मई के बीच इलाके में बिजली के खंभों से चिंगारी निकलने की कोई शिकायत दर्ज नहीं हुई थी।

वहीं, घटना स्थल पर मौजूद बिजली उपकरण भी सही हालत में पाए गए। हालांकि आसपास के दो घरों में बिजली बंद होने की शिकायत जरूर सामने आई थी।