
टॉवर गिरने के बाद ग्रामीणों में नाराजगी है। जनपद सदस्य सतीश भेड़िया ने बताया कि, टॉवर बीच से मुड़कर टूट गया। उन्होंने कहा कि यदि यह रिहायशी इलाके में गिरता तो बड़ा हादसा हो सकता था। बीएसएनएल जैसे सरकारी संस्थान के टॉवर का इस तरह गिरना उसकी गुणवत्ता और रखरखाव पर सवाल खड़े करता है।
बालोद में दूसरी बार गिरा BSNL का टॉवर
जानकारी के अनुसार जिले में बीएसएनएल टॉवर गिरने की यह दूसरी घटना है। पिछले साल डौंडीलोहारा ब्लॉक के खामतराई गांव में भी टॉवर गिर गया था, जिससे आंगनबाड़ी भवन क्षतिग्रस्त हो गया था। उस टॉवर को दोबारा खड़ा करने में करीब एक साल का समय लगा था।
तीन गांवों में नेटवर्क ठप
बीएसएनएल कर्मचारियों के मुताबिक गिरा हुआ टॉवर करीब 10 साल पुराना था। टॉवर ध्वस्त होने से भेड़िया नवागांव, अंगारी और बिरेतरा क्षेत्र में बीएसएनएल नेटवर्क पूरी तरह ठप हो गया है, जिससे संचार सेवाएं प्रभावित हो रही हैं।
टीन-छप्पर उड़े, बिजली पोल भी टूटे
ग्रामीण बंटी साहू और प्रकाश सिन्हा ने बताया कि तेज हवाओं के कारण कई मकानों के टीन-छप्पर उड़ गए, जिससे लोगों को आर्थिक नुकसान हुआ है। वहीं कई स्थानों पर बिजली लाइनें क्षतिग्रस्त होने से विद्युत आपूर्ति बाधित हो गई।
अंगारी रोड, बोड़की और निपानी रोड क्षेत्र के करीब 15 गांवों में अंधेरा छा गया। तूफान में 50 से अधिक पेड़ उखड़ गए और 11 से अधिक बिजली पोल क्षतिग्रस्त हो गए। बिजली विभाग की टीम मरम्मत कार्य में जुटी हुई है।
35 पदों के मुकाबले सिर्फ 6 लाइन स्टाफ, कर्मचारियों की कमी से चरमराई बिजली व्यवस्था, फॉल्ट सुधार में हो रही देरी
बालोद जिले में बिजली व्यवस्था पर कर्मचारियों की भारी कमी का असर साफ दिखाई देने लगा है। बिजली लाइनों के रखरखाव और फॉल्ट सुधार के लिए बालोद डिवीजन में 35 लाइन स्टाफ की आवश्यकता है, लेकिन वर्तमान में केवल 6 कर्मचारियों के भरोसे पूरी व्यवस्था संचालित हो रही है। ऐसे में कहीं तार टूटने, पेड़ गिरने, ट्रांसफार्मर खराब होने या अन्य तकनीकी फॉल्ट आने पर सुधार कार्य में देरी हो रही है, जिसका खामियाजा उपभोक्ताओं को भुगतना पड़ रहा है।
बिजली विभाग के कर्मचारियों के अनुसार पर्याप्त लाइन स्टाफ नहीं होने से एक साथ कई स्थानों पर फॉल्ट आने की स्थिति में सुधार कार्य प्रभावित होता है। कई बार कर्मचारियों को दूर-दराज के ग्रामीण क्षेत्रों और शहर में एक साथ बिजली बहाली का काम करना पड़ता है। जिससे समय अधिक लगता है। मानसून के दौरान यह समस्या और गंभीर होने की आशंका है।