
जानकारी के अनुसार, लेमरू क्षेत्र निवासी शिवरतन माझी (54) अपनी पत्नी सुशीला बाई (50) के साथ गुरुवार सुबह गांव से लगे लाम पहाड़ जंगल में 6 बकरियां चराने गए थे। शाम तक एक बकरी वापस नहीं लौटी, जिसके बाद दोनों उसकी तलाश में दोपहर बाद फिर जंगल की ओर निकल गए।
बकरी की खोज के दौरान जंगल में अचानक मौसम खराब हो गया। तेज आंधी, बारिश और तूफान शुरू हो गया। दंपती घर लौट रहे थे, तभी रास्ते में एक विशाल पेड़ टूटकर उन पर गिर पड़ा।
पेड़ के नीचे दबने से शिवरतन माझी की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि उनकी पत्नी सुशीला बाई घायल हो गईं। किसी तरह वह मलबे से निकलकर गांव पहुंचीं और परिजनों को घटना की जानकारी दी।
ग्रामीणों ने चलाया रेस्क्यू, अस्पताल में मृत घोषित
सूचना मिलते ही ग्रामीण जंगल पहुंचे और कड़ी मशक्कत के बाद पेड़ के नीचे दबे शिवरतन को बाहर निकाला। उन्हें तत्काल जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने जांच के बाद मृत घोषित कर दिया।
घायल सुशीला बाई का अस्पताल में उपचार जारी है। उनकी हालत फिलहाल स्थिर बताई जा रही है।
खेती-किसानी से चलाते थे परिवार
मृतक के बेटे हेमगिर ने बताया कि शिवरतन माझी खेती-किसानी कर परिवार का पालन-पोषण करते थे। परिवार में दो बेटे और दो बेटियां हैं। शिवरतन परिवार के मुखिया थे और उनकी मौत से पूरे परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।
पुलिस ने कराया पोस्टमार्टम
मेडिकल कॉलेज अस्पताल से सूचना मिलने के बाद चौकी पुलिस ने पंचनामा कार्रवाई कर शव का पोस्टमार्टम कराया और बाद में परिजनों को सौंप दिया। मामले में आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी की जा रही है।
प्रशासन की अपील
हादसे के बाद प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि खराब मौसम, तेज आंधी और तूफान के दौरान जंगलों या बड़े पेड़ों के आसपास जाने से बचें। अधिकारियों ने कहा कि मौसम खराब होने पर सुरक्षित स्थानों पर शरण लेना ही सबसे बेहतर उपाय है।
गौरतलब है कि हाल ही में पाली थाना क्षेत्र में भी तेज आंधी-तूफान के दौरान पेड़ गिरने से तीन लोगों की जान चली गई थी। लगातार हो रहे ऐसे हादसों ने मौसम के दौरान सतर्कता की आवश्यकता को फिर उजागर कर दिया है।