पहली बारिश में ही टापू बना गौरगाँव,सोढूर नाला में बाढ़, उड़ीसा बॉर्डर का गौरगाँव नाला पार करने को लोग जान जोखिम में डाल रहे, प्रशासन बेखबर

पूरन मेश्राम/मैनपुर। विकासखंड मुख्यालय मैनपुर से 35 किलोमीटर दूर उड़ीसा सीमा से लगा ग्राम पंचायत गौरगाँव से महज आधा किमी दूर उड़ीसा जाने वाली मार्ग पर सोंढूर नाला मे मानसून की पहली बारिश ने ही तबाही मचा दी है। आवाजाही करने वाले ग्रामीणों को जान जोखिम में डालकर नाला पार करना पड़ रहा है। वर्षो से इसकी जानकारी होने के बावजूद भी शासन प्रशासन बेखबर है। 12 मई शुक्रवार के दिन सुबह 5 बजे से भारी बारिश होने के कारण सोंढूर नाला ऊफान पर रहा।ग्रामवासियों ने बताया कि नदी में तेज बहाव के कारण आवाजाही बिल्कुल ठप हो गई है।
हर साल यही कहानी
Chhattisgarh Crimes

ग्रामीणों का आरोप है कि हर साल पहली बारिश में ही सोढूर नाला उफान पर आ जाती है और गौरगाँव टापू बन जाता है।पुलिया नहीं होने से ग्रामीण पेड़ के तने, ट्यूब या नाव के सहारे नदी नाला मे पार करते हैं। पिछले साल भी इसी कारण एक गर्भवती महिला को समय पर अस्पताल नहीं पहुंँचा पाने से परेशानी हुई थी। पतंग मरकाम अध्यक्ष जय अंबेडकर वादी युवा संगठन ने कहा कि बिजली नहीं है तो अंधेरे में जी रहे हैं,अब पुल नहीं है तो पानी में डूबकर मर रहे हैं।

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