
याचिकाकर्ता शिवकृपा मिश्रा ने एसोसिएट प्रोफेसर पंकजनयन पाण्डेय और असिस्टेंट प्रोफेसर राजेंद्र मोहंती की नियुक्तियों पर सवाल उठाते हुए को नियमविरुद्ध बताया है।
बगैर PHD उपाधिधारक को नियुक्ति देने का आरोप
याचिकाकर्ता शिवकृपा मिश्रा ने बताया कि उनकी शिकायत पर उच्चशिक्षा विभाग ने साल 2023 में सूक्ष्म जांच कमेटी बनाई थी, जिसके बाद कमेटी ने जांच रिपोर्ट भी दे दी है, जिसके अनुसार बगैर PHD उपाधिधारक को नियुक्ति देने का आरोप है। वहीं याचिकाकर्ता का दावा है कि उनसे कम डिग्री और अनुभवी अभ्यर्थी को नियुक्ति दी गई है।
उच्च शिक्षा विभाग के निर्देश पर पहले भी हो चुकी है कार्रवाई
याचिकाकर्ता ने कहा कि उच्च शिक्षा विभाग के निर्देश पर गठित जांच समिति की सिफारिश के बाद
जनसंचार विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. शहीद अली को बर्खास्त किया गया था, जिसके बाद उनकी जगह डॉ. प्रमोद जेना की नियुक्ति की गई। नियुक्ति में यूजीसी की न्यूनतम अहर्ता नहीं रखने वाले उम्मीदवार को मौका दिया गया है। जो सिर्फ एमए उत्तीर्ण है। इसी तरह राजेंद्र मोहंती की नियुक्ति पर सवाल उठाते हुए बताया कि उनका नाम मेरिट सूची में नहीं था। फिर भी उन्हें नियुक्ति दे दी गई। जबकि, मेरिटधारी अभ्यर्थियों को नियुक्ति सूचना ही नहीं दी गई।
हाईकोर्ट ने कहा- शिकायतों पर विचार करना हाईकोर्ट की जिम्मेदारी है
डॉ. शिवकृपा मिश्रा ने हाईकोर्ट में बताया कि उन्होंने नियुक्तियों में अनियमितता को लेकर पहले विश्वविद्यालय में अभ्यावेदन दिया था। लेकिन, विश्वविद्यालय प्रशासन ने अब तक उस पर कोई निर्णय नहीं लिया। इसके चलते उन्होंने हाईकोर्ट से हस्तक्षेप की मांग की है। इस मामले की सुनवाई करते हुये हाईकोर्ट ने यूनिवर्सिटी प्रबंधन को आदेश दिया है दो माह के भीतर याचिकाकर्ता के अभ्यावेदन पर निर्णय लें। कोर्ट ने यह भी कहा है कि शिकायतों पर विचार करना विश्वविद्यालय की जिम्मेदारी है।