वंदेभारत से टकराई गाय : दुर्ग-रायपुर के बीच ट्रैक पर हुआ हादसा, जांच के बाद ट्रेन रवाना

Chhattisgarh Crimes

भिलाई। देश की प्रीमियम ट्रेन वंदेभारत की चपेट में सोमवार शाम एक गाय आ गई। इस ट्रेन पर लगातार पथराव की घटनाओं के बाद यह नयी दुर्घटना हो गई। यह दुर्घटना दुर्ग से रायपुर के बीच चरोदा रेलवे स्टेशन के पास हुई। इसके चलते ट्रेन लगभग 4 मिनट वहां खड़ी रही। रेलवे स्टॉफ ने चेक किया तो गाय की टक्कर से ट्रेन के इंजन में मामूली स्क्रैच आया था। इसके बाद उसे बिलासपुर के लिए रवाना कर दिया गया।

दुर्ग आरपीएफ की ओसी पूर्णिमा राय ने बताया कि नागपुर से बिलासपुर को जाने वाली वंदेभारत में CRO (कैटल रन ओवर) की घटना हुई है। उन्होंने बताया कि ट्रेन नंबर 20826 दुर्ग सोमवार शाम को रवाना हुई। वो जैसे ही शाम 17.35 बजे सिरसा गेट के पास पहुंची किलोमीटर 850/24 पास एक गाय ट्रेन के सामने आ गई। 130 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से ट्रेन गाय से टकराई तो गाय दूर जा गिरी। इसके चलते ट्रेन 4 मिनट तक रुकी रही। रेलवे स्टॉफ ने तुरंत उसे चेक किया। उन्होंने देखा कि उससे ट्रेन को कोई नुकसान नहीं हआ। सामने इंजन में एक मामूली सा स्क्रैच आया है। इसके बाद ट्रेन को बिलासपुर के लिए रवाना कर दिया गया।

पहले से था इंजन के सामने का हिस्सा डैमेज

आरपीएफ से मिली जानकारी के मुताबिक कुछ समय पहले इस ट्रेन में MRO (मैन रन ओवर) का केस हुआ था। नागपुर से चलने के बाद एक आदमी ट्रेन के सामने आ गया था। इससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई थी। आदमी के टकराने से ट्रेन के सामने का हिस्सा डैमेज हो गया था। वो डैमेज रिपेयर नहीं हो पाया था और फिर से उसी जगह गाय टकरा गई। इसलिए रेलवे का कहना है कि उनका कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ है।

लोगों को जागरूक करने का काम करेगी आरपीएफ

रेलवे पुलिस फोर्स (RPF) की ओसी ने बताया कि CRO के केस में कोई मामला दर्ज नहीं किया जाता है। ऐसा दोबारा न हो इसके लिए आरपीएफ की टीम उन लोगों के पास जाएगी जो मवेशी पालते हैं। फोर्स उन लोगों को समझाएगी की वो रेलवे ट्रैक की तरफ न जाएं और जाएं तो अपने जानवरों की देख रेख करें। उनकी जरा सी लापरवाही से बड़ी दुर्घटना भी हो सकती है।

दुर्ग से रायपुर के लिए निकलने वाली वंदे भारत ट्रेन में दुर्ग से रायपुर के बीच दो बार पथराव की घटना भी हो चुकी है। इससे उसकी बोकी का कांच ब्रेक हो चुका है। आरपीएफ ने इसमें मामला दर्ज कर जांच भी की, लेकिन पत्थर मारने वाले अराजक तत्वों का अब तक पता नहीं चल पाया है।