कोरोना से पति, सास, जेठ की मौत, सदमे में पत्नी ने भी फांसी लगा कर दे दी जान

Chhattisgarh Crimes

भोपाल। मध्य प्रदेश के इंदौर शहर के समीप स्थित देवास में अग्रवाल समाज अध्यक्ष बालकिशन गर्ग और उनके परिवार को इस बात का जरा भी अंदाजा नहीं था कि अगले आठ दिनों में कोरोना उनकी दुनिया को बर्बाद कर देगा। 14 अप्रैल को घर के मुखिया बालकिशन गर्ग की पत्नी चंद्रकला देवी का कोरोना से दुखद निधन हो गया। परिवार इस मृत्यु से सदमे में डूब गया, लेकिन तीन दिन ही बीते थे कि 17 अप्रैल को परिवार को एक और जबरदस्त झटका लगा और घर के बड़े बेटे संजय अग्रवाल को कोरोना ने छीन लिया। परिवार इस मृत्यु से बुरी तरह टूट गया। लेकिन नियति को शायद कुछ और ही मंजूर था। घर हुई इन मौतों को देखकर छोटी बहू रेखा (45) इस सदमे को सहन नहीं कर सकी और बुधवार को उसने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। एक सप्ताह में पूरा परिवार उजड़ गया।

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बताया जा रहा है कि गर्ग परिवार का किराना का थोक का व्यापार है। घर की छोटी बहू इंदौर के नामी हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉक्टर राजेश अग्रवाल की छोटी बहन थी। इस घटना ने पूरे इलाके में हाहाकार मचा दिया है। हर कोई अब परिवार में बचे लोगों को संभालने में लगा है।

जानकारी के अनुसार अग्रवाल समाज देवास के अध्यक्ष बालकिशन गर्ग की पत्नी चंद्रकला देवी का 14 अप्रैल को निधन हो गया। परिवार उनकी मौत के सदमे से उभरा भी नहीं था कि 17 अप्रैल को बड़े बेटे संजय गर्ग की मौत हो गई। इसके बाद 19 अप्रैल को छोटे बेटे स्वप्नेश गर्ग की सांस थम गई। तीनों कोरोना संक्रमित थे। परिवार पर एक साथ आए इस संकट सेे स्वप्नेश की पत्नी छोटी बहू रेखा गर्ग टूट गई और अवसाद में जाने से बुधवार सुबह फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। बड़े और छोटे बेटे के दो दो बच्चे हैं। परिवार के मुखिया बालकिशन गर्ग की भी तबीयत अत्यधिक खराब है। बड़े बेटे की पत्नी हादसे के चलते सदमे में है।

परिवार से जुड़े वरुण अग्रवाल ने बताया कि गर्ग परिवार का किराना का थोक व्यापार है करीब 20 साल पहले रेखा बहु बन कर आई थी लेकिन सप्ताह भर में परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़ सहन नहीं कर सकी इस हंसते खेलते परिवार को कोरोना ने पूरी तरह उजाड़ दिया। बड़े और छोटे बेटे के दो दो बच्चे हैं। परिवार के मुखिया बालकिशन गर्ग की भी तबीयत अत्यधिक खराब है। बड़े बेटे की पत्नी हादसे के चलते सदमे में है। कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर से देवास में स्थिति बेकाबू होती जा रही है. स्वास्थ्य सेवाएं बदहाल है। समय पर मरीजों को न रेमडेसिविर इंजेक्शन मिल रहे है और न ही आक्सीजन की व्यवस्था हो रही है।