शादी समारोह में मेहमानों से बदसलूकी करने वाले DM को अब पद से हटाया गया

Chhattisgarh Crimes

त्रिपुरा। त्रिपुरा सरकार ने अगरतला के जिला मजिस्ट्रेट डॉ. शैलेश कुमार यादव को हटा दिया है। उनके खिलाफ कोरोना गाइडलाइन्स के उल्लंघन के आरोप में एक शादी समारोह के दौरान दुर्व्यवहार करने का आरोप लगा है. डीएम की बदसलूकी का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया था. बदसलूकी का मामला सामने आने के बाद डीएम के खिलाफ बीजेपी विधायकों ने मोर्चा खोल दिया था. बदसलूकी का वीडियो सामने आने के बाद डीएम की जमकर आलोचना हो रही है. रविवार को मुख्य सचिव मनोज कुमार को लिखे पत्र में शैलेश यादव ने उनसे अगरतला के डीएम के प्रभार से मुक्त करने का अनुरोध किया था, क्योंकि इस घटना के बारे में उनसे पूछताछ चल रही है.

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दरअसल त्रिपुरा में शैलेश कुमार यादव नामक डीएम का एक वीडियो वायरल हुआ है उसमें दिख रहा है कि वो एक मैरिज हॉल में घुसते हैं और वहां मौजूद लोगों को अपशब्द कहने लगते हैं. इतना ही नहीं वो पुलिसकर्मी से वहां मौजूद मेहमानों को मारने के साथ बाहर निकालने के लिए भी कहते हैं. जब वहां मौजूद मेहमान उनसे बात करने की कोशिश करते हैं तो डीएम तुरंत उन्हें गिरफ्तार करने का आदेश दे देते हैं.

डीएम वीडियो में वहां शादी कराने आए पुरोहित को भी चाटा मारते हुए नजर आए. डीएम ने कोरोना प्रोटोकॉल के नाम पर इस तरह की हरकत की.हालांकि जिस परिवार ने शादी का आयोजन किया था उन्होंने जिलाधिकारी से पहले ही इसकी आज्ञा ली थी लेकिन जब उन्होंने दस्तावेज दिखाए तो डीएम ने उसे फाड़ कर उन्हीं पर फेंक दिया. हालांकि मुख्यमंत्री बिप्लब कुमार देव के डीएम के खिलाफ जांच के आदेश के बाद शैलेश कुमार यादव को सस्पेंड कर दिया गया.

डीएम शैलेश यादव ने कहा कि इन लोगों के खिलाफ नाइट कर्फ्यू और महामारी आपदा कानून के तहत मामला दर्ज होना चाहिए.यही नहीं डीएम यादव ने वहां मौजूद पुलिसकर्मियों पर आरोप लगाया कि वो प्रशासन को सहयोग नहीं दे रहे हैं. वीडियो में शैलेश यादव यह कहते हुए नजर आते हैं कि वो सरकार से पूर्व अगरतला पुलिस स्टेशन के प्रभारी की शिकायत करेंगे और उन्हें निलंबित करने की सिफारिश करेंगे.

घटना के तुरंत बाद, मुख्यमंत्री ने मुख्य सचिव को इस घटना पर एक रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए कहा और इस मामले की जांच के लिए दो आईएएस अधिकारियों की एक समिति गठित की गई। प्रारंभ में, हालांकि यादव ने माफी मांगी थी, उन्होंने समिति को बताया कि उन्होंने कोरोनो वायरस के प्रसार को रोकने के लिए अपने कर्तव्य के अनुसार कानून-व्यवस्था लागू की थी।