ईचरादी गांव के 65 वन अतिक्रमणकारियों को वहां से हटाने की तैयारी में जुटा वन विभाग

दो बार विभाग ने जारी किया कारण बताओ नोटिस जवाब नहीं आने पर 26 मई को खदेड़ने की पूरी कर ली है वन विभाग तैयारी

Chhattisgarh Crimes

पूरन मेश्राम/ छत्तीसगढ़ क्राइम्स

मैनपुर। जंगल को रेगिस्तान बनाने में कहीं न कहीं जंगल के रहवासियों के साथ-साथ वन विभाग के मैदानी अमले के कर्मचारी भी उतना ही दोषी है। चलिए कोई बात नहीं जब जागो तब सवेरा वन विभाग की टीम अब फील्ड में मुस्तैद नजर आता है।

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उसका श्रेय अगर दिया जाए तो उपनिदेशक उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व गरियाबंद के वरुण जैन को जिसने जंगल को बचाने के लिए एक अभियान के रूप में सब टीम को मुस्तैदी के साथ जंगल क्षेत्रों के दौरा करने के लिए कहा गया खुद भी जंगल क्षेत्रों में दौरा करने के लिए कोई कसर बाकी नहीं छोड़ते आज उसी का परिणाम है अवैध रूप से ग्रामीणों के द्वारा जंगलों में बसाहट करके हजारों पेड़ों की बलि चढ़ाने वाले लोगों को वहां से खदेड़ा जा रहा है। ज्ञात हो कि 6 दिन के बाद ईचरादी गांव के 65 वन अतिक्रमणकारियों ने अपना झोपड़ी,टपरा,मैदान को छोड़कर नहीं जाने पर वहां से हटाने की तैयारी वन विभाग ने कर ली है जिसका विधिवत नोटिस तामिल भी हो गया है।

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प्रेस विज्ञप्ति में उपनिदेशक वरुण जैन ने कहा कि अब समय आ गया है जंगल को बचाने के लिए सभी जागरूक लोगों को आगे आना होगा तब कहीं जंगल बच पाएगी पुराने स्वरूप में उसे लाया जा सकता है अन्यथा रेगिस्थान बनने में देरी नहीं लगेगी।
इचरादी गांव के ताजा हालात हम बताने जा रहे हैं।

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विकासखंड मुख्यालय मैनपुर राजापडाव क्षेत्र उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व बफर जोन वन परिक्षेत्र तौरेंगा के अंतर्गत गरीबा बीट के आरक्षित कक्ष क्रमांक 1201 एवं 1202 में कुल रकबा 158.724 में 2005 के बाद उड़ीसा एवं अन्य क्षेत्रों से आए हुए व्यक्तियों के द्वारा जबरदस्ती झोपड़ी,बाड़ी एवं खेती करने के उद्देश्य से अवैध रूप से जंगलों पर कब्जा करते हुए अतिक्रमण किया गया जिसे पड़ोस के ग्रामीणों के द्वारा समझाइश देते हुए जंगलों को अवैध रूप से कटाई नहीं करने की भी बात कही गई लेकिन मानने से इनकार वन अतिक्रमणकारियों के द्वारा हजारों पेड़ों की बलि दे दी गई आज पूरा जंगल रेगिस्तान नजर आ रहा है।

जिसका भरपाई करने वर्षों बीत जाएंगे

वन विभाग तौरेंगा परिक्षेत्र बफर जोन के अधिकारी कर्मचारियों के द्वारा कार्यालयीन पत्र के माध्यम से दो बार उक्त भूमि पर अतिक्रमण के सबूत के साथ पेश होने कारण बताओ नोटिस भी 65 ग्रामीणों के लिए जारी किया गया।

अतिक्रमण क्षेत्र का गूगल अर्थ सैटेलाइट इसरो भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान केंद्र से प्राप्त ड्रोन सर्वे के द्वारा वन विभाग ने पूरे सर्वे करके देखने पर पता चला उक्त वन भूमि पर अवैध रूप से अतिक्रमण किया गया है एवं वृहद पैमाने पर वृक्षों की कटाई की गई है।

वर्तमान में उक्त स्थल में लगभग 2020 नग वृक्षों की ठूंठ तथा 499 वृक्षों के गार्डलिंग पाया गया है। गूगल अर्थ सैटलाइट इमेजरी के माध्यम से काबिज वन भूमि स्थल का अवलोकन किया गया जिसमें उक्त वन भूमि को लगभग 2011-12 के बाद ही अतिक्रमण होना पाया गया है जिसका व्यक्तिगत वन अधिकार पत्र भी प्रस्तुत नहीं की गई है।

इसलिए वन्य जीव संरक्षण अधिनियम 1972 की धारा 34 (क)एवं भारतीय वन अधिनियम 1927 संशोधन 1965 की धारा 80 का के तहत शक्तियों का प्रयोग करते हुए आदेश पारित किया गया है वन भूमि पर किए गए अतिक्रमण/बागडे/ मैदान/ झोपड़ी/टपरा को 10 दिवस के भीतर स्वयं से वन भूमि पर किए गए अतिक्रमण से मुक्त कर लेवे अन्यथा वन विभाग 26 मई को दल बल के साथ प्रशासनिक सहयोग लेकर अतिक्रमण से मुक्त कराते हुए वास्तविक स्वरूप में लाया जाएगा एवं वन अपराध मे उपयोग की गई वस्तुओं को राजसात कर उसमे होने वाले समस्त व्यय वन अतिक्रमणकारियों से भू राजस्व की भांति वसूल किए जाने का भी वन विभाग ने नोटिस ग्रामीणों को थमाया है।

अपने मकान मे ताला बंद करके जाने वाले ग्रामीणों के घर सहित 65 घरों में सीडी कैसेट जिसमें अतिक्रमण एवं वृक्षों की कटाई दर्शाई गई है साथ ही इससे प्राप्त मानचित्र गूगल अर्थ एवं ड्रोन सर्वे मानचित्र भी नोटिस के साथ थमाया गया है।

वन अतिक्रमणकारियों ने रूठे कंठ से अपनी गलती स्वीकार करते हुए सिर्फ और सिर्फ रहने के लिए झोपड़ी और कुछ बाड़ी की मांग करते हुए बाकी सभी को छोड़ने की बात कह रहे हैं।

इसके साथ ही वहां पर वन विभाग पुराने स्वरूप में लाने के लिए पौधारोपण करेगी उसे मिलजुलकर वन प्रबंधन के दिशा मे काम करने ग्रामीण कह रहे हैं। अब देखना होगा आगे क्या होता है।

वही दूसरी ओर अब हमारे युवा वर्ग भी जंगल के संरक्षण संवर्धन की दिशा में एक हाथ आगे बढ़ाते कार्य कर रहे हैं।
2 दिन पहले गरियाबंद से वापसी के समय दबनई नाला के जंगल में भीषण आग लग गई थी उसे बुझाने के लिए वन विभाग के अधिकारियों से सहयोग लिया गया लेकिन कोई मदद नहीं मिलने पर स्वयं आगे आकर कोया भूमकाल सेना kbs के वरिष्ठ कार्यकर्ता गौतम मंडावी एवं पप्पू नेताम ने एक घंटा मशक्कत करते हुए आग को बुझाने मे सफल रहे जिसका लोगों ने प्रशंसा भी कर रहे हैं।