प्रमं आवास योजना के नाम पर राजधानी के 98 परिवारों से ठगी के ख़ुलासे से प्रदेश सरकार की विश्वसनीयता फिर दाँव पर : भाजपा

Chhattisgarh Crimes

पूर्व मुख्यमंत्री हैरत में, कहा- राजधानी में ही जब नगर निगम की फर्ज़ी सील और रसीद बनाकर मकान आवंटन हो रहा है तो प्रदेश के बाकी हिस्सों का अनुमान सहज ही लगाया जा सकता है

डॉ. सिंह ने इस सवाल को लेकर प्रदेश सरकार को कठघरे में खड़ा किया है कि क्या इस तरह की संगठित लूट को भी सत्ता-संरक्षण प्राप्त है और ठग-ग़िरोह से भी कमीशन की राशि वसूली जा रही है?

डॉ. रमन की मांग- प्रमं आवास योजना के नाम पर हुई इस संगठित ठगी और लूट के मामले की उच्चस्तरीय जाँच हो ताकि पता चले कि इन ठग ग़िरोहों और घोटालेबाजों को किसका संरक्षण प्राप्त है?

रायपुर। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने प्रधानमंत्री आवास योजना के नाम पर राजधानी के 98 परिवारों से ठगी करके ग़रीबों के साथ धोखाधड़ी किए जाने के मामले के ख़ुलासे को बेहद गंभीर बताते हुए प्रदेश सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाया है। डॉ. सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना को लेकर प्रदेश सरकार की उदासीनता के चलते एक तो यूँ ही ग़रीबों को आवास मुहैया नहीं हो रहे हैं, ऊपर से ठगी करके ज़रूरतमंदों की गाढ़ी कमाई के करोड़ों रुपए लूट लिए जाने के इस मामले ने एक बार फिर प्रदेश सरकार की विश्वसनीयता को दाँव पर लगा दिया है। डॉ. सिंह ने इस मामले की उच्चस्तरीय जाँच की मांग की है।

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भाजपा राष्ट्रीय उपाध्यक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. सिंह ने कहा कि प्रदेश में कांग्रेस के शासनकाल में आम आदमी छलावों, धोखाधड़ी और दीग़र तमाम अपराधों के साए में साँसें लेने को मज़बूर हो चला है। प्रदेश का कोई एक भी कोना इन आपराधिक कारनामों से बचा नहीं है। माफियाओं का ग़िरोह हर तरह के अपराधों को अंजाम तो दे ही रहा है, अब प्रदेश में ग़रीबों तक को सपने दिखाकर ठगे जाने का यह सिलसिला चल पड़ा है। डॉ. सिंह ने हैरत जताई कि भ्रष्टाचार और अपराध मुक्त प्रदेश के नित नए जुमले गढ़ने वाली कांग्रेस की राज्य सरकार की नाक के नीचे राजधानी में ही जब प्रधानमंत्री आवास दिलाने के नाम पर नगर निगम की फर्ज़ी सील और रसीद बनाकर मकान बेचने का काम हो रहा है तो प्रदेश के बाकी हिस्सों में ग़रीबों को ठगने-लूटने वाले ग़िरोहों का अनुमान सहज ही लगाया जा सकता है। हाईकोर्ट में इस मामले को लेकर दायर याचिका ने मामले का ख़ुलासा किया, इसका साफ़ मतलब है कि प्रदेश सरकार का एक तो अपराधियों पर कोई अंकुश नहीं रह गया है और वे सरेआम अपने कुकृत्यों से प्रदेश के भोले-भाले व ग़रीबों को लूटने में लगे हैं, दूसरे प्रधानमंत्री आवास योजना को लेकर प्रदेश सरकार का राजनीतिक दुराग्रह ग़रीब परिवारों तक के सपनों को चूर-चूर करने में लगा है। डॉ. सिंह ने इस सवाल को लेकर प्रदेश सरकार को कठघरे में खड़ा किया है कि क्या इस तरह की संगठित लूट को भी सत्ता-संरक्षण प्राप्त है और ठग-ग़िरोह से भी कमीशन की राशि वसूली जा रही है?

भाजपा राष्ट्रीय उपाध्यक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. सिंह ने कहा कि प्रदेश सरकार के नाकारापन के चलते अब राजधानी इन परिवारों को दोहरी आर्थिक मार सहनी पड़ रही है। प्रमं आवास के नाम पर एक तो उनकी सारी जमा-पूंजी लुटेरों को हत्थे चढ़ गई, ऊपर से अब उन्हें कोर्ट-कचहरी के खर्चे भी वहन करने पड़ रहे हैं। डॉ. सिंह ने कहा कि केंद्र सरकार ग़रीबों को आवास देने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है ,मोदी सरकार ने 6 लाख से ऊपर आवास छत्तीसगढ़ प्रदेश के लिए स्वीकृत किए लेकिन राज्य सरकार 1 लाख के करीब ही प्रधानमंत्री आवास बना रही है जो गरीब जनता के साथ अन्याय है । भूपेश सरकार के इस फैसले से पाँच लाख परिवार पक्के मकान से वंचित हो गए । प्रदेश सरकार की उदासीनता के चलते अब प्रधानमंत्री आवास योजना में भी बड़ा घोटाला हो रहा है। डॉ. सिंह ने कहा कि राजधानी में प्रधानमंत्री आवास योजना के नाम पर हुई इस संगठित ठगी और लूट के मामले की उच्चस्तरीय जाँच कराई जाए ताकि यह पता चल सके कि इन ठग ग़िरोहों और घोटालेबाजों को किसका संरक्षण प्राप्त है?