खुद बनती थी IPS, बॉयफ्रेंड और भाई को बनाती थी सब इंस्पेक्टर और हेड कॉन्स्टेबल, ‘हाईटेक मुन्ना भाई गैंग’ का पर्दाफाश

Chhattisgarh Crimes

नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस ने सरकारी नौकरी के लिए होने वाली प्रतियोगी परीक्षा में पेपर लीक कराने वाले हाई टेक मुन्ना भाई गैंग का पर्दाफाश करते हुए एक युवती समेत 4 लोगों को गिरफ्तार किया है. पुलिस का दावा है कि इस गैंग की सरगना युवती है, जो खुद को आईपीएस बताती थी. लोगों को प्रभाव में लेने के लिए युवती अपने भाई और ब्वॉयफ्रेंड को सब इंस्पेक्टर व हेड कांस्टेबल की नकली वर्दी पहनाकर साथ चलती थी. आरोपियों की पहचान वैशाली, भाई लव कुमार, रोहित और हिमांशू के तौर पर की गई है. इस गैंग का खुलासा उस समय हुआ था, जब पिछले दिनों नारायणा के एक सेंटर पर रोहित नामक एक युवक को नकल करते हुए पकड़ा गया था. उसी से हुई पूछताछ के बाद इस गैंग का पर्दाफाश हुआ है.

क्या है मामला

वेस्ट डिस्ट्रिक्ट की डीसीपी उर्विजा गोयल ने बताया कि पुलिस ऑनलाइन एग्जाम में चीटिंग करने वालों पर नजर रख रही है. पिछले दिनों नारायणा इलाके में स्थित ॐ एंड चंद्र एसोसिएट नामक एग्जामिनेशन सेंटर पर नकल करते हुए एक युवक को पकड़ा गया था. सोनीपत जवाहर नगर निवासी रोहित को मोबाइल फोन से चीटिंग करते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया था. इसके खिलाफ 4 मार्च को केस दर्ज कर लिया गया था. पूछताछ में रोहित ने इस पूरे रैकेट का पर्दाफाश किया. रोहित के पास से मोबाइल फोन बरामद किया गया था. मोबाइल फोन का डाटा रिकवर करने के दौरान कॉल डिटेल्स आदि की जांच में हुई. जिसके बाद तीन लोगों के बारे में जानकारी मिली. जिनके नाम वैशाली, लव कुमार और हिमांशू थे. इन्हें दिल्ली और हरियाणा में अलग-अलग जगहों से गिरफ्तार किया गया

कैसे चलता था चीटिंग का यह धंधा

गिरफ्तार किए गए आरोपियों ने पूछताछ में खुलासा किया कि गैंग की सरगना वैशाली है. इस गैंग के निशाने पर ग्रामीण इलाके के बेरोजगार युवा होते थे, जो सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे होते थे. वैशाली खुद को आईपीएस अफसर बताती थी. इनके पास से सब इंस्पेक्टर व हेड कॉन्स्टेबल की दो वर्दी भी मिली हैं. इन वर्दियों को पहनकर उसका भाई और बॉय फ्रेंड्स साथ चलते थे, ताकि लोगों पर प्रभाव जमाया जा सके. ये लोग दावा करते थे कि सरकारी महकमों के उच्च अधिकारियों से उनकी सांठगांठ है. सरकारी नौकरी के एग्जाम में चीटिंग से पास करवाने के लिये ये लोग कैंडिडेट से 15 से 25 लाख रुपये तक की डिमांड करते थे.

ये गैंग प्राइवेट एग्जाम सेंटर को टारगेट करते थे, वहां पर डमी कैंडिडेट को बैठा कर पेपर लीक करवाते थे. इस मामले में एग्जाम सेंटर के कर्मचारियों की भूमिका की जांच भी की जा रही है. जो हाईटेक एप्लीकेशन के जरिये पेपर लीक करवाते थे. एग्जाम सेंटर के मालिक की भूमिका भी संदिग्ध है, जिसकी जांच की जा रही है. इनके पास से 17 एग्जामिनेशन फॉर्म्स भी बरामद किए गए हैं, जो सरकारी नौकरी के हैं.