
किशन सिन्हा/छुरा
छुरा। छत्तीसगढ़ राज्य में वनांचल क्षेत्र में रहनेवाले लोग अपने आर्थिक क्रियाकलाप हेतु ग्रामीण प्रारंभ से ही एक हद तक वनोपज पर निर्भर रहा है जिसमें गांव के लोग वर्ष भर भिन्न भिन्न प्रकार के वनोपज संग्रहण कर अपना और अपने परिवार का भरण पोषण व वनोपज का संग्रहण कर अतिरिक्त आय अर्जित करते हैं।

विदित हो कि गांवो में अक्सर आर्थिक आय पूरी तरह से प्रकृति पर निर्भर होता है, फिर चाहे बात मानसून में किए जाने वाले खेती की हो या समय समय पर वनाअंचल से वनोपज प्राप्ती की हो। गांवो में खरीफ़ की फसल कटाई के बाद दलहन तिल्हन की खेती किया जाता है जिसके बाद लोग जंगलों का रुख करते हैं, जिसमें फरवरी से मार्च महीने में महुआ के फूल का संग्रह आर्थिक दृष्टि से वृहद रूप से किया जाता है जिसके बाद चार और तेंदू के फल के साथ हरा सोंना (तेन्दू पत्ते)का संग्रह ग्रामीण जन करते हैं, तत्पश्चात मई के आखरी सप्ताहों में भारत के सबसे इमारती वृक्षों में से एक वृक्ष साल जिसे स्थानीय बोली में सराई कहा जाता है उसके बीजों को जंगल से बटोरने का क्रम हाल फिरहाल में जारी है।

सराई का बीज एक पंखुड़ी नुमा फूल के मध्य में फलित होता है जो सुख कर पेड़ से नीचे गिरता है ग्रामीणजन इन्हीं पंखुड़ी नुमा बीज को एकत्रित कर इसे अच्छी तरह सुखा कर आग में भुन देते हैं जिससे बिज पंखुड़ी से साबूत रूप में प्राप्त हो जाता है, फिर साबूत बीज को लकड़ी या पत्थर की सहायता से दर कर दो हिस्से में कर अच्छी तरह साफ कर स्थानीय बाजारों में थोक वा चिल्हर दरों पर बेचा जाता है। वर्तमान में सराई बीज का कीमत 15 से 20 रूपये प्रति किलोग्राम चल रहा है। रही बात इन बीजों के उपयोग की तो इनसे आयुर्वेदिक तेल साबून वा खाद्य सामाग्री बनाये जाते हैं, एक विशेष बात यहां उल्लेखनीय यह है कि प्राचीन काल में जब भी आकाल का स्थिति निर्मित होने पर जब लोग अनाज के दाने दाने को मोहताज हुआ करते थे तब इन्ही वनोपज के बीजों को आटे के रुप में लोग आहरित किया करते थे।
वर्तमान में लोककल्याण की विभिन्न योजना शासन द्वारा चलाई जा रही है जिससे ऐसे किसी भी परिस्थिति से आसानी से निपटा जा सकता है। किन्तु सरकार द्वारा वनोपज समिति में समर्थ मूल्य पारित होने के बाद भी खरीदी ना होना स्थानीय प्रबंधन समितियों पर एक प्रश्न चिन्ह खड़ा करता है।
इसके विपरित वर्तमान में स्कूल व कालेज स्तर के बच्चों को विद्यालय से गर्मी छूट्टी मिला हुआ है ऐसे गर्म माहौल में खुले आसमान के नीचे हरे भरे पेड़ों की शीतल छाया में माता पिता के संग खेल खेल में आर्थिक क्रियाकलाप से जुड़ना बच्चों को आगे चल कर उनके जहन में सुखद स्मृति का एक अध्याय जोड़ देता हैं जिन्हें आगे चल कर याद करना युवाओं के लिये बेहद ही रोमांचकारी प्रतीत होता है।