महिलाओं को सुरक्षित रखने खास ट्रेनिंग : IPS डांगी बोले- महिलाओं की सुरक्षा पहला काम, बताया क्यों एक पुलिसकर्मी को गर्व महसूस करना चाहिए

Chhattisgarh Crimes

रायपुर। नेताजी सुभाष चंद्र बोस पुलिस अकादमी चंद्रखुरी में खास ट्रेनिंग प्रोग्राम आयोजित हुआ। यहां छत्तीसगढ़ राज्य के अलग-अलग जिलों से CSP,ASP रैंक के अधिकारी पहुंचे। इस वर्कशाॅप में महिला सुरक्षा और महिलाओं से जुड़े क्राइम में पुलिस के रिस्पॉन्स के बारे में एक्सपर्ट्स ने बात की।

प्रदेश के अलग-अलग जिलों से अफसर यहां पहुंचे।

राष्ट्रीय अपराध एवं अन्वेषण ब्यूरो के निर्देशन में पाँच दिनों तक ये ट्रेनिंग प्रोग्राम चलेगा। उद्घाटन सत्र में अकादमी के निदेशक रतन लाल डांगी ने कहा- जब तक महिलाओं में उनके खिलाफ होने वाले क्राइम के प्रति डर ख़त्म नहीं किया जाएगा तब तक न ही समाज एवं न राष्ट्र का विकास हो पाएगा। उन्होंने कहा कि महिलाओं के प्रति बढ़ते हुए अपराधों पर नियंत्रण रखने के लिए पुलिस के जांच अधिकारी और अफसरों की यह जिम्मेदारी होती है की वो महिला संबंधी किसी भी प्रकार के अपराध घटित होने की सूचना प्राप्त होने पर तत्काल अपराध दर्ज कर जांच शुरू करें।

अपराधियों के खिलाफ मामले को ठोस सबूतों के साथ न्यायालय में पेश करे । कार्यशाला को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि पुलिस को ऐसे सार्वजनिक स्थान जैसे स्कूल, कॉलेज, बस स्टैंड, भीड़-भाड़ वाले स्थानों, बाज़ार या अन्य जगहों पर जहाँ महिलाओं की उपस्थिति बनी रहती है, वहां लगातार पुलिस पेट्रोलिंग करनी चाहिए। असामाजिक तत्वों पर निगाह रखनी चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि पुलिस अधिकारियों को इस बात पर भी गर्व महसूस करना चाहिए कि भगवान ने उनको सुरक्षा देने के लिए चुना है। पुलिस के रूप में आम नागरिकों एवं कमज़ोर लोगों की सुरक्षा के लिए आपको अवसर दिया है। इस दायित्व को पूरा करने के लिए आपको शासन ने वैधानिक अधिकार भी दिए हैं । उन अधिकारों का सदुपयोग करके महिलाओं में आत्म-विश्वास पैदा करना चाहिए।

इस पाँच दिवसीय कार्यशाला में सभी पुलिस अधिकारियों को महिलाओं से संबंधित कानूनी प्रावधानों में और उनमें हुए नए बदलावों के बारे में बताया जा रहा है। ये भी बताया जाएगा कि कैसे फाॅरेंसिक टीम की मदद लेकर केस सॉल्व किए जा सकते हैं। कोर्ट के दिशा निर्देशों की जानकारी भी अफसरों को दी जाएगी।