रायपुर के आमापारा में 200 किलो हल्दी से तैयार की गई देवी की मुर्ति

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रायपुर। नवरात्रि के मौके पर आपने देवी की प्रतिमाओं को अलग-अलग स्वरूप में विराजमान होते हुए देखा होगा । लेकिन रायपुर के आमापारा में इस बार 200 किलों हल्दी का इस्तेमाल करके दुर्गा माता की प्रतिमा तैयार की गई है। देवी के स्वरूप को देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु दूर-दूर से पहुंच रहे हैं। न्यू आजाद दुर्गा उत्सव समिति ने 11 फीट की देवी की प्रतिमा स्थापित की है । इसके साथ ही शीतला माता के स्वरूप में छोटी प्रतिमा भी विराजमान है। इसे बनाने के लिए गाठ हल्दी ,खड़ी हल्दी और कच्छी हल्दी का इस्तेमाल किया गया है। मूर्ति तैयार करने में हल्दी पाउडर का भी उपयोग किया गया है।

धर्मग्रंथ की मान्यताओं पर तैयार की जात है मूर्ति

न्यू आजाद दुर्गा उत्सव समिति के अध्यक्ष दीपक जायसवाल ने बताया कि हर साल समिति की ओर से माता की प्रतिमा स्थापित की जाती हैं। समिति का हमेशा प्रयास रहता है की देवी की प्रतिमा स्थापित हो वह धर्मग्रंथ में वर्णित मान्यताओं के आधार पर ही हो। सनातन धर्म में पूजा पाठ के दौरान हल्दी का अत्यधिक महत्व होता है इसलिए हमने इस बार 200 किलो से अधिक हल्दी का इस्तेमाल कर माता जी की प्रतिमा स्थापित की है।

43 साल से हो रहा आयोजन

समिति के सदस्यों ने बताया कि न्यू आजाद दुर्गा उत्सव समिति की ओर से पिछले 43 सालों से दुर्गा उत्सव का आयोजन किया जा रहा है । इससे पहले उनसे सीनियर आयोजन किया करते थे जिस परंपरा को हुए अब निभाते आ रहे हैं । हमारा प्रयास रहता है हर साल दुर्गा उत्सव का आयोजन भव्यता के साथ किया।

पूजा पाठ में हल्दी का महत्व

सनातन धर्म में पूजा पाठ में हल्दी का महत्व अधिक है। किसी भी तरह की अनुष्ठानों में हल्दी का उपयोग जरूर किया जाता है । खास तौर पर महाराष्ट्र और दक्षिण भारत में हल्दी को बेहद शुभ माना जाता है।