बेलगाम होता बाजार भाव

Chhattisgarh Crimes

रायपुर। कोरोना काल में स्वास्थ्य विभाग की चौतरफा नाकामी के बीच खाद्य और आपूर्ति विभाग की अराजकता प्रदेश के आम लोगों पर भारी पड़ रही है। नौकरशाही की तरफ से लगातार ऐसे फैसले लिए जा रहे हैं कि आम आदमी चारों तरफ से जकड़न में फंसकर दम तोड़ दे। दवाओं की भारी कमी और कालाबाजारी से दो-चार हो रहे लोगों को खाने-पीने के सामान की कमी से बुरी तरह जूझना पड़ रहा है।

कीमतों में जिस तरह से आग लगी हुई है, उससे साफ हो जाता है कि व्यवस्था पूरी तरह से नाकाम है। व्यावहारिक दृष्टि का अभाव है। आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता का आकलन करने से लेकर आपूर्ति सुनिश्चित कराने में व्यवस्था की नाकामी समस्या को और गंभीर ही बना रही है। इससे आगे की स्थिति है कि प्रशासनिक अधिकारियों की तरफ से ऐसे अव्यावहारिक आदेश भी जारी किए जा रहे हैं, जिनका अनुपालन ही संभव नहीं हैं। थोक व्यापारियों को आदेशित किया जा रहा है कि वे ठेला लेकर गली-मुहल्लों में खाद्य सामान की आपूर्ति करें।

यह विचारणीय है कि प्रतिदिन लाखों रुपये का कारोबार करने वालों से गली में ठेला लगाने की उम्मीद करने वाले अधिकारियों पर किस तरह सवाल उठाया जाना चाहिए और उनके इस निर्णय से फैली अराजकता के लिए क्या कार्रवाई की जानी चाहिए? गंभीरता से मंथन करना होगा कि इस तरह अव्यावहारिक लोगों के हाथ में निर्णय का अधिकार नहीं दिया जाए। यह घातक साबित हो सकता है। एक ही दिन में हकीकत समझ में आने के बाद स्वयं मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने हस्तक्षेप करते हुए व्यवस्था में बदलाव किया। वास्तविक रूप से देखा जाए तो पूरी व्यवस्था अव्यावहारिकता और पिछलग्गूपन का शिकार दिखती है और इसका खामियाजा आम आदमी को भुगतना पड़ रहा है।

कोरोना से बचाव के लिए उपयोगी दवाएं और खाद्य पदार्थों की कीमतों में जिस तरह से आग लगी हुई है, उससे सहज आकलन हो जाता है कि यह संगठित अपराध है। सब्जी और फलों का उत्पादन करने वाले किसानों को उचित कीमत नहीं मिल रही और दूसरी तरफ उपभोक्ताओं को तीन से चार गुना कीमत देकर सामान खरीदना पड़ रहा है। उदाहरण के लिए टमाटर की कीमत नहीं मिलने के कारण किसान मुफ्त में बांट रहे हैं और बाजार में कीमत तीस रुपये किलो तक पहुंच जा रही है।

खुदरा विक्रेता परेशान हैं कि उन्हें लाभ नहीं हो रहा। सरकार की तरफ से पहल होनी चाहिए कि आवश्यक वस्तुओं की कीमतों को बेलगाम नहीं होने दिया जाए।