
गुरुवार (16 फरवरी) को फाल्गुन कृष्ण एकादशी है। इसे विजया एकादशी कहा जाता है। इस दिन किए गए व्रत-उपवास से अटके कामों में सफलता मिल सकती है। गुरुवार को एकादशी होने से इस दिन भगवान विष्णु और महालक्ष्मी के साथ ही देवगुरु बृहस्पति की पूजा का शुभ योग बन रहा है।
उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के मुताबिक, एकादशी पर भगवान विष्णु के लिए व्रत-उपवास किया जाता है। स्कंद पुराण के वैष्णव खंड में एकादशी महात्म्य अध्याय में सालभर की सभी एकादशियों का महत्व बताया गया है। गुरुवार का कारक ग्रह देवगुरु बृहस्पति है।
एकादशी पर ऐसे कर सकते हैं भगवान विष्णु का पूजन
घर के मंदिर में गणेश पूजन के बाद भगवान विष्णु के सामने व्रत और पूजा करने का संकल्प लें। इसके बाद भगवान विष्णु के साथ ही महालक्ष्मी की प्रतिमा रखें।
देवी-देवताओं का दक्षिणावर्ती शंख से अभिषेक करना चाहिए। इसके लिए शंख में केसर मिश्रित दूध भरें और पतली धार के साथ ही भगवान की प्रतिमाओं पर चढ़ाएं। दूध के बाद स्वच्छ जल से अभिषेक करें।
विष्णु-लक्ष्मी को पीले चमकीले वस्त्र चढ़ाएं, मौसमी फल और मिठाई का भोग तुलसी के साथ लगाएं। पूजा में ऊँ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जप करें।
ऐसे कर सकते हैं देवगुरु बृहस्पति की पूजा
गुरुवार को गुरु ग्रह के लिए चने की दाल का दान करें। बृहस्पति की पूजा शिवलिंग रूप में की जाती है, इसलिए शिवलिंग पर पीले फूल, चने की दाल चढ़ाएं, बेसन के लड्डू का भोग चढ़ाएं। ऊँ बृं बृहस्पतये नम: का जप करें। एकादशी पर जरूरतमंद लोगों को धन, अनाज, जूते-चप्पल और कपड़ों का दान करना चाहिए। किसी मंदिर में पूजन सामग्री भेंट करें। बाल गोपाल की पूजा करें। माखन-मिश्री का भोग तुलसी के साथ लगाएं। कृं कृष्णाय नम: मंत्र का जप करें।
पद्म और स्कंद पुराण के मुताबिक परेशानियों से छुटकारे और जीत पाने के लिए करते हैं विजया एकादशी
फाल्गुन महीने के कृष्ण पक्ष की एकादशी को विजया एकादशी व्रत किया जाता है। इस बार ये 16 फरवरी, गुरुवार को किया जाएगा। पद्म और स्कंद पुराण में इस व्रत के बारे में बताया गया है। नाम के मुताबिक इस एकादशी का व्रत करने से हमेशा जीत मिलती है। सबसे पहले श्रीराम ने ये व्रत किया था। इसके बाद परंपरा के चलते कई राजाओं ने विजया एकादशी व्रत किया। जिससे उन्हें जीत मिली।
इस व्रत के बारे में पद्म और स्कंद पुराण में बताया गया है। कहा गया है कि जब दुश्मनों से घिरे हो तब मुश्किल हालातों में भी विजया एकादशी से जीत तय की जा सकती है। इस एकादशी के महात्म्य को सुनने और पढ़ने से ही पाप खत्म हो जाते हैं। आत्मबल भी बढ़ता है। विजया एकादशी व्रत करने से शुभ फल बढ़ते हैं। परेशानियां दूर होती हैं। इस एकादशी व्रत से भगवान विष्णु की कृपा मिल जाती है।
विजया एकादशी व्रत विधि
इस दिन भगवान विष्णु की मूर्ति स्थापित कर धूप, दीप, फूल, चंदन और तुलसी से आराधना करें। जिससे हर तरह के दोष दूर हो जाते हैं और मनोकामनाएं पूरी होती है। भगवान विष्णु को तुलसी बहुत प्रिय है इसलिए तुलसी को पूजा में जरूरी शामिल करें।
व्रत कथा सुनें और रात में भगवान के भजन करते हुए दुख नाश की प्रार्थना करें। रात में जागरण करने से पुण्य मिलता है। व्रत करने से एक दिन पहले ब्रह्मचर्य का पालन करते हुए सात्विक भोजन करना चाहिए। व्रत करने से कठिन कामों में जीत मिल सकती है।
विजया एकादशी पर क्या करें और क्या नहीं
इस एकादशी पर कठिन व्रत करने का विधान है। जल और अन्न दोनों नहीं लेना चाहिए। इतना कठिन व्रत न कर पाएं तो फलाहार कर सकते हैं और पानी भी पी सकते हैं। बच्चे, बूढ़ें और बीमार लोग व्रत न करें। इस दिन चावल न खाएं।
किसी भी तरह से झूठ न बोलें और हिंसा न करें। नशा न करें। मन, वचन और कर्म से किसी को परेशान न करें। ब्रह्मचर्य का पालन करें। जरूरतमंद लोगों को खाना खिलाएं।