अंबिकापुर के गांधीनगर स्थित श्री महावीर हॉस्पिटल में फर्जी डिग्री के आधार पर मरीजों का इलाज करने का मामला सामने आया

Chhattisgarh Crimesअंबिकापुर के गांधीनगर स्थित श्री महावीर हॉस्पिटल में फर्जी डिग्री के आधार पर मरीजों का इलाज करने का मामला सामने आया है। यहां करीब दो साल से ICU में सेवा दे रहे डॉक्टर नुरैल आलम के खिलाफ पुलिस ने FIR दर्ज की है। स्वास्थ्य विभाग की जांच में उसकी MBBS डिग्री का QR कोड दूसरे डॉक्टर के नाम पर मिला। सीएमएचओ की शिकायत पर गांधीनगर थाना पुलिस ने आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4) के तहत केस दर्ज किया है।

जानकारी के मुताबिक, सरगुजा सीएमएचओ और नर्सिंग होम एक्ट के नोडल अधिकारी की संयुक्त टीम ने महावीर हॉस्पिटल में जांच की थी। इस दौरान डॉक्टरों और कर्मचारियों के दस्तावेजों और पंजीयन की पड़ताल की गई। ICU में कार्यरत डॉक्टर नुरैल आलम की MBBS डिग्री पर दर्ज QR कोड स्कैन किया गया तो वह किसी दूसरे डॉक्टर के नाम पर दर्ज मिला।

नर्सिंग होम एक्ट के नोडल अधिकारी डॉ. पीके सिन्हा के मुताबिक, QR कोड स्कैन करने पर डिग्री का पंजीयन झारखंड के अमरेश कुमार, पिता अभिनंदन कुमार, निवासी महुआटोली, थाना खेलागांव, जिला रांची के नाम पर मिला। जांच में आशंका जताई गई कि अमरेश कुमार के पंजीयन में कूटरचना कर उस पर नुरैल आलम का नाम दर्ज किया गया था।

कलेक्टर के निर्देश पर दर्ज हुई FIR

इस मामले में सरगुजा कलेक्टर अजीत वसंत ने FIR दर्ज कराने के निर्देश दिए थे। इसके बाद सीएमएचओ कार्यालय, दर्रीपारा में पदस्थ सहायक ग्रेड-3 और लीगल शाखा प्रभारी की ओर से थाने में लिखित शिकायत दी गई। शिकायत और जांच रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने नुरैल आलम के खिलाफ BNS की धारा 318(4) के तहत अपराध दर्ज किया है।

आउटसोर्सिंग कंपनी भी जांच के दायरे में

जांच में सामने आया कि नुरैल आलम को सीआईपीएसीए हेल्थ केयर सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड ने आउटसोर्स के जरिए महावीर हॉस्पिटल में नियुक्त कराया था। अब यह भी जांच का विषय है कि कंपनी ने डॉक्टर की डिग्री और पंजीयन का सत्यापन किए बिना उसे अस्पताल में काम करने की अनुमति कैसे दी।

स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों के मुताबिक, जिले के अन्य निजी अस्पतालों में भी आउटसोर्स कंपनियों के जरिए डॉक्टरों की नियुक्ति की जांच की जरूरत है। पुलिस अब कंपनी के रिकॉर्ड और अस्पताल प्रबंधन से पूछताछ कर सकती है। यह भी पता लगाया जाएगा कि नुरैल आलम कितने समय से ICU में काम कर रहा था और इस दौरान कितने मरीजों का इलाज किया।