कुलेश्वरनाथ महादेव मंदिर में युवाओं, महिला, पुरुषों में बढ़ा त्रिपुंड का क्रेज़

आस्था श्रद्धा और भक्ति की रहीं भीड

Chhattisgarh Crimes

राजिम। राजिम माघी पुन्नी मेला के प्रथम दिन श्रद्धा भक्ति और आस्था की भीड़ कुलेश्वर महादेव मंदिर में दिखी। दूर-दराज से आए दर्शनार्थी ने सुबह स्नान कर रेत पर शिवलिंग बनाकर पूजन किए नदी में दीपदान कर महादेव मंदिर के दर्शन के लिए पहुंचे जहां हजारों की संख्या में भीड़ पंक्ति में अपनी बारी का इंतजार करते खड़े रहें मंदिर के पास दर्शनार्थियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए बासं की लकड़ी का घेरा किया गया हैं, पुलिस की सुरक्षा और व्यवस्था के बीच सभी मंदिर में भगवान कुलेश्वर नाथ के दर्शन कर मस्तक पर त्रिपुंड लगवाने के लिए सबसे अधिक उत्साहित दिखाई दिए जिसमें बच्चे बुजुर्ग युवा और महिलाएं सम्मिलित हैं सभी ने अपनी पसंद से ओम शिवलिंग और सूर्य देव की त्रिपुंड अपने मस्तक पर लगवाया।

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शास्त्रों के अनुसार माथे पर तिलक लगाने की परंपरा प्राचीन काल से चली आ रही हैं ललाट पर जो तीन रेखाओं का तिलक लगाते हैं उसे त्रिपुंड कहते हैं। मंदिर प्रांगण में तिलक लगा रहें पंडित ने बताया की त्रिपुंड लगाने से मन शांत होता हैं और मानसिक सुख की प्राप्ति होती हैं त्रिपुंड के तिलक में 27 देवताओं का वास होता हैं। त्रिपुंड में तीन रेखाएं होती है एक रेखा में नौ देवता होते हैं त्रिपुंड तिलक लगाने से ग्रह दोष दूर होते हैं इससे भूत-प्रेत बाधा दूर होती है कोई भी नकारात्मक शक्ति आपके पास नहीं आ सकती और शिव की कृपा प्राप्त होती है जीवन में अखंड शुभ फल की प्राप्ति होती है।

त्रिपुंड लगाने से साधक में निर्णय लेने और स्मरण शक्ति का विकास होता हैं ह्रदय में शुद्ध भाव लेकर इसे लगाने से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता हैं। शास्त्रों के अनुसार माथे पर तिलक लगाने की परंपरा प्राचीन काल से चली आ रही हैं ललाट पर जो तीन रेखाओं का तिलक लगाते हैं उसे त्रिपुंड कहते हैं। कवर्धा से आईं रोहनी साहू और रजनी साहू से तिलक के बारे मे पूछने पर बताया की हम लोग राजिम माघी पुन्नी मेला हर वर्ष आते हैं और यहां कथा पूजन भी करवाते हैं यहां आकर बहुत अच्छा लगता हैं।त्रिपुंड हम लोग शौक के तौर पर लगवाएं हैं इसी प्रकार अन्य भक्तो में भी त्रिपुंड का क्रेज अधिक दिखाई दिया।