चिटफंड की तरह है केंद्र का कृषि कानून : मुख्यमंत्री भूपेश

Chhattisgarh Crimes

रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने केंद्र सरकार के कृषि संबंधी कानूनों पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा, केन्द्र सरकार ने केवल पूंजीपतियों के लिए कानून बनाया है। केंद्र सरकार के ये कानून चिटफंड की तरह हैं, जो शुरूआत में अच्छा लगेगा। लेकिन बाद में बर्बाद करेगा। यह बातें उन्होंने विधानसभा के विशेष सत्र में कहीं। उन्होंने आगे कहा कि रमन सिंह भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हैं, लेकिन उनकी पार्टी ने चुनाव प्रचार के लिए उन्हें बिहार नहीं भेजा। मुख्यमंत्री ने भाजपा विधायकों से पूछा, केंद्र सरकार किसानों को बोनस नहीं देती तो भाजपा विधायक इसका विरोध क्यों नहीं करते? मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया, हम केंद्रीय कानून को छू भी नहीं रहे हैं। विपक्ष विशेष सत्र पर सवाल उठा रहा था, इसका भी सरकार की तरफ से जवाब दिया गया। सीएम ने कहा विशेष सत्र इसलिए लाया गया ताकि संशोधन एक्ट पर चर्चा हो और जनता जान सके, किसान जान सके कि हम क्या कर रहे हैं। उन्होंने कहा, केंद्र का कानून किसान और उपभोक्ता के साथ धोखा है। मुख्यमंत्री ने आगे कहा- भाजपा के लोग हम से मांग कर रहे थे कि साठ लाख मिला है, धान खरीदिए। पंजाब हमसे छोटा है न, उसे एक करोड़ साठ लाख दिया गया है, चलिए दिलवाईए हमें भी दिलवाईए, हम भी एक- एक दाना खरीदेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा, धान से एथेनॉल बनाने की अनुमति दी गई है लेकिन शर्त है कि एफसीआई से धान लिया जाए, क्यों ऐसा।

ट्रेक्टर से विशेष सत्र में हिस्सा लेने पहुंचे विकास उपाध्याय

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मंगलवार को संसदीय सचिव विकास उपाध्याय ट्रैक्टर लेकर विधानसभा पहुंचे। उन्होंने बिल के विरोध में मोदी सरकार पर निशाना साधा। कहा, केंद्र सरकार की नीयत में ही खोट है। वह सुनियोजित तरीके से जन विरोधी कानूनों को लागू कर रही है। दरअसल, राज्य की भूपेश बघेल सरकार केंद्र के कृषि सुधार बिल के विरोध में मंडी संशोधन विधेयक लेकर आई है। सुबह कांग्रेस मुख्यालय राजीव भवन से ट्रैक्टर लेकर संसदीय सचिव विकास उपाध्याय विधानसभा के लिए निकले। विकास उपाध्याय ने कहा, विधानसभा में पारित भूपेश सरकार के नए कृषि कानून को राज्यपाल को मंजूर करना ही पड़ेगा, उन्होंने कहा अनुच्छेद 200 के अनुसार राज्य विधानसभा में पारित कानून को राज्यपाल 14 दिनों से ज्यादा लंबित नहीं रख सकता वह स्वीकृति देगा, पुनर्विचार के लिए लौटाएगा या फिर राष्ट्रपति की अनुमति के लिए आरक्षित रखेगा। विकास उपाध्याय ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार अपने पार्टी हित को ध्यान में रख सत्ता में आते ही संविधान में कई अनावश्यक संशोधन कर पूरे देश की प्रजातंत्र को अपने मुट्ठी में करना शुरू कर दिया।

सरकार और राजभवन के बीच टकराव पर बहस

भाजपा विधायकों ने राज्यपाल को लेकर कुछ मंत्रियों के बयान पर आपत्ति की। भाजपा विधायक शिवरतन शर्मा ने कहा, राज्यपाल को आप सीमाएं न बताएं। जवाब में संसदीय कार्य मंत्री रविंद्र चौबे ने कहा कि सबकी अपनी सीमाएं हैं और सबको उसका पालन करना चाहिए। राजभवन का राजनीतिकरण किया जाएगा तो अधिकारों और कर्तव्यों की बात होगी। भाजपा विधायक बृजमोहन अग्रवाल ने राजभवन के राजनीतिकरण के बयान को लेकर आपत्ति जताई। संसदीय कार्यमंत्री ने सत्र के औचित्य पर उठे सवालों का जवाब देते हुए कहा, छत्तीसगढ़ की जनता ने हमें बहुमत दिया है। बहुमत प्राप्त दल को यह अधिकार है कि विधानसभा का सत्र कब बुलाया जाए। उन्होंने कहा, सत्र किसानों के मुद्दे पर कानून बनाने के लिए बुलाया गया है।