छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में ASI के बेटे में 4 युवकों ने 17 साल की छात्रा को ब्लैकमेल कर 14.50-लाख रुपए और 450 ग्राम सोने के जेवर वसूल लिए। आरोपियों ने पहले छात्रा से दोस्ती की, फिर जान से मारने और परिवार को नुकसान पहुंचाने की धमकी देकर करीब 1 साल तक उससे पैसे और गहने लेते रहे।
जांच में सामने आया कि पीड़िता के दादा SECL के रिटायर्ड अफसर हैं। उन्होंने बीमारी के कारण बैंक खाता, एटीएम और लॉकर पोती को सौंप दिया था। वह चोरी-छिपे बैंक से पैसे और लॉकर में रखे गहने लड़कों को देती रही। इस मामले में पुलिस ने रविवार को चारों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।
हालांकि, इस मामले में 2 आरोपी अभी भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर है। पुलिस गिरफ्तारी के लिए उनके संभावित ठिकाने पर रेड कार्रवाई कर रही है। जांच में यह भी सामने आया कि छात्रा से वसूल गए पैसों से आरोपी नेपाल घूमने गए थे और हर रोज महंगी पार्टियां करते थे। मामला सरकंडा थाना क्षेत्र का है।
जानिए कैसे खुला पूरा मामला…
TI प्रदीप आर्या ने बताया कि पुलिस को सूचना मिली थी कि आदर्श शर्मा और एक नाबालिग लगातार महंगे होटलों में फिजूलखर्ची कर रहे हैं। उनके पास बड़ी मात्रा में सोने-चांदी के गहने भी है। सूचना के आधार पर पुलिस ने दोनों को होटल से पकड़कर पूछताछ की।
पूछताछ के दौरान पता चला कि आदर्श की हरकतों से परेशान होकर उसके पिता ने उसे घर से निकाल दिया था। वहीं, जब पुलिस ने पैसे और गहनों के बारे में पूछताछ की, तो उनके एक परिचित 12वीं की छात्रा का नाम सामने आया।
दोस्ती बनी ब्लैकमेलिंग की वजह
जांच के दौरान पुलिस ने छात्रा से पूछताछ की। पता चला कि उसकी पहले आरोपियों से दोस्ती हुई थी। इस दौरान आरोपियों ने उसका भरोसा जीतकर उससे नजदीकियां बढ़ाईं।
शुरुआत में छात्रा ने दोस्ती के कारण उनकी आर्थिक मदद भी की, लेकिन बाद में आरोपियों ने उसे जान से मारने, परिवार के सदस्यों को नुकसान पहुंचाने और सड़क दुर्घटना कराने की धमकी देकर ब्लैकमेल करना शुरू कर दिया।
डर के कारण छात्रा पहले बैंक खातों से पैसे निकालकर और बाद में घर के लॉकर से सोने के गहने निकालकर आरोपियों को देती रही।
रिटायर्ड अफसर ने पोती को सौंपा बैंक और लॉकर
छात्रा से पूछताछ में पुलिस को पता चला कि राजीव विहार निवासी उसके दादा SECL के रिटायर्ड अफसर हैं। अस्वस्थ होने के कारण उन्होंने अपने बैंक खाते, एटीएम और बैंक लॉकर का संचालन पोती को सौंप रखा था। छात्रा इन्हीं खातों से पैसे निकालकर और लॉकर में रखे गहने चोरी-छिपे आरोपियों को देती रही।
इसके बाद पुलिस ने रिटायर्ड अफसर से पूछताछ की, जिसमें उन्होंने इसकी पुष्टि की। जांच में यह भी सामने आया कि जनवरी 2025 में छात्रा की पहचान आयुष यादव और उसके साथियों से हुई थी। मामले में रिटायर्ड SECL अफसर की शिकायत पर पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।