GRP के बर्खास्त आरक्षक लक्ष्मण गाइन ने ट्रेनों में गांजा तस्करों से अवैध वसूली और गांजा की तस्करी कर 1.03 करोड़ रुपए की संपत्ति बनाई। एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) की जांच के बाद आय से अधिक संपत्ति का खुलासा हुआ है। उसकी वैध आय और खर्च के बीच 1 करोड़ 3 लाख 33 हजार रुपए से अधिक का अंतर मिला है।
आरोपी की कुल आय 86.76 लाख रुपए आंकी गई, जबकि खर्च और निवेश 1.90 करोड़ रुपए से ज्यादा पाए गए। ACB ने इस मामले में पर्याप्त सबूत मिलने के बाद आरोपी आरक्षक के खिलाफ विशेष न्यायाधीश (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) की कोर्ट में चार्जशीट फाइल किया है।
लक्ष्मण गाईन पर आरोप है कि, GRP बिलासपुर में पोस्टिंग के दौरान उसने साथी आरक्षकों के साथ मिलकर ट्रेनों में गांजा तस्करों को पकड़ा। तस्करों के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत कार्रवाई करने के बजाय जब्त गांजा अपने पास रख लिया। उन्हें छोड़ने के एवज में मोटी रकम वसूल की।
वसूली की रकम आपस में बांटने का भी आरोप है। मामला सामने आने के बाद GRP थाने में एनडीपीएस एक्ट की धारा 20(बी) और 29 के तहत केस दर्ज किया गया। जांच के बाद एसीसीयू बिलासपुर ने इस मामले में कोर्ट में चालान पेश किया था। फिलहाल, आरोपी इस केस में बिलासपुर जेल में बंद है।
खुद गांजा तस्करों से मिलकर कर रहे थे कारोबार
GRP के चारों आरक्षक संतोष राठौर, मन्नू प्रजापति, सौरभ नागवंशी और लक्ष्मण गाइन एसपी की एंटी क्राइम यूनिट में थे, जिन्हें ट्रेनों में गांजा, नशीली टेबलेट्स, शराब तस्करी सहित अवैध हथियार परिवहन करने वालों पर कार्रवाई की जिम्मेदारी दी गई थी। अफसरों से चारों को अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर कार्रवाई करने की खुली छूट थी।
टीम में शामिल पुलिसकर्मी रायगढ़ से लेकर रायपुर और राजनांदगांव तक जाकर जांच करते थे। आरक्षकों को टीआई के बजाए सीधे बड़े अफसरों को रिपोर्ट करने की भी छूट थी। इसका फायदा उठाकर ये सभी खुद गांजा तस्करों से मिलकर कारोबार कर रहे थे।