
विरोध कर रहे 10 ग्रामीणों को पुलिस ने हिरासत में लिया था। इसके बाद कांग्रेस के शहर और ग्रामीण जिला अध्यक्ष समेत बड़ी संख्या में कार्यकर्ता थाने पहुंच गए और घेराव किया। करीब एक घंटे बाद पुलिस ने सभी ग्रामीणों को छोड़ दिया।
पर्यटन विभाग के MD सौमिल रंजन ने दावा किया है कि 1100 पेड़ों की जगह 11 हजार पौधे लगाए जाएंगे। वहीं, पर्यावरण एक्सपर्ट का कहना है कि 1100 पेड़ काटने से रोज 10 हजार लोगों की ऑक्सीजन पर असर पड़ेगा। उनके मुताबिक, औद्योगिक क्षेत्र होने के कारण रायपुर में और ज्यादा पेड़ होने चाहिए।
ग्रामीण बोले- 30 से 40 साल पुराने हैं पेड़
ग्रामीणों का कहना है कि जंगल में काटे जा रहे पेड़ 30 से 40 साल पुराने हैं। एक पेड़ को बड़ा होने में कई साल लगते हैं। ऐसे में पुराने पेड़ों की कटाई पर्यावरण के लिए नुकसानदायक है।
ग्रामीणों ने कहा कि उन्हें विकास कार्यों से परेशानी नहीं है, लेकिन इसके लिए पुराने पेड़ नहीं काटे जाने चाहिए। उनकी मांग है कि फिल्म सिटी के लिए नवा रायपुर में दूसरी जगह चुनी जाए।
जंगल बचाने आंदोलन तेज करेगी समिति
जंगल बचाने के लिए 9 महीने से निगरानी कर रही निरगारी समिति भी आंदोलन तेज करने की तैयारी में है। समिति के सदस्य कृणाल सिन्हा ने कहा कि इस मुद्दे को आम लोगों तक पहुंचाकर जन आंदोलन बनाया जाएगा।
उन्होंने पर्यटन मंडल के पौधरोपण के दावे पर सवाल उठाए। उनके मुताबिक, MD ने 1100 पौधे लगाने की बात कही है, जबकि मौके पर गिनती में सिर्फ 530 पौधे मिले। ये पौधे भी सूख चुके हैं। पौधे पर्यटन मंडल और फिल्म सिटी की बाउंड्री के बीच लगाए गए थे।