राजापड़ाव क्षेत्र के ग्राम कोकड़ी में ऐतिहासिक बैठक, 03 जुलाई को एसडीएम को सौंपा जाएगा ज्ञापन, 7 दिवस में समाधान नहीं हुआ तो होगा घेराव
पूरन मेश्राम/मैनपुर। विकास खंड मुख्यालय मैनपुर राजापड़ाव क्षेत्र के ग्राम कोकड़ी में आज 2 जुलाई दिन गुरुवार को जय अंबेडकरवादी युवा संगठन एवं किसान संघर्ष समिति के तत्वावधान में हजारों मूलनिवासियों,किसानों, महिलाओं, युवाओं, जनप्रतिनिधियों एवं ग्राम सभाओं के पदाधिकारियों की विशाल बैठक आयोजित हुई। बैठक का शुभारंभ भारत के संविधान निर्माता बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर के छायाचित्र पर माल्यार्पण तथा क्षेत्र के देवी-देवताओं की पूजा-अर्चना सेवा-अर्जी एवं पिछले बैठक मे लिये गये निर्णय पर समीक्षा करते हुए बैठक में संविधान प्रदत्त अधिकारों, पेसा अधिनियम एवं वनाधिकार कानून, 2006 के क्रियान्वयन पर गंभीर चर्चा हुई। क्षेत्रवासियों ने आरोप लगाया कि कानून में ग्राम सभाओं को सर्वोच्च अधिकार दिए गए हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर उनकी लगातार अनदेखी की जा रही है।

ग्राम सभा को दरकिनार कर वन विभाग की कार्यवाही पर भारी नाराजगी
बैठक में वक्ताओं ने कहा कि गांव-गांव में पेसा ग्राम सभा एवं वनाधिकार समितियां विधिवत गठित हैं। इसके बावजूद वन विभाग ग्राम सभाओं एवं वनाधिकार समितियों को विश्वास में लिए बिना कार्यवाही कर रहा है, जो संविधान एवं कानून की मूल भावना के विपरीत है।
वनाधिकार पट्टों में वर्षों की देरी से बढ़ रहा आक्रोश
क्षेत्रवासियों ने बताया कि 8 से 10 वर्ष पूर्व वनाधिकार पट्टों के लिए आवेदन दिए गए थे। ग्राम सभा, वनाधिकार समिति एवं बुजुर्गों के कथन सहित सभी आवश्यक प्रक्रियाएं पूर्ण होने के बावजूद आज तक पात्र लोगों को पट्टे नहीं दिए गए। केवल “दो साक्ष्य” एवं “2005 की सैटेलाइट इमेजरी” का हवाला देकर दावे निरस्त किए जा रहे हैं।
ग्रामीणों ने कहा कि खेतों में यदि महुआ, कुसुम एवं अन्य वनोपज के वृक्ष हैं तो यह हमारे पूर्वजों द्वारा जंगलों के संरक्षण का प्रमाण है। हम जल,जंगल और जमीन के संरक्षक हैं। हमारे पूर्वज इस धरती पर स्वतंत्रता से पहले से निवास करते आए हैं।
वन विभाग के परिसीमन का विरोध
बैठक में वन विभाग द्वारा किए गए परिसीमन (सीमांकन) पर भी आपत्ति जताई गई। ग्रामीणों ने स्पष्ट कहा कि हम वर्षों से अपनी पारंपरिक देव-सीमा को ही मानते आए हैं और आगे भी उसी का पालन करेंगे। ग्राम सभा की सहमति के बिना किसी भी प्रकार की मनमानी स्वीकार नहीं की जाएगी।
शिक्षा, पेयजल, बिजली और किसानों की समस्याओं पर भी उठी आवाज
बैठक में मुख्यमंत्री स्कूल जतन योजना के अधूरे भवन, शिक्षकों की भारी कमी, विद्यालयों में समय पर शिक्षकों की अनुपस्थिति, बंद पड़े सोलर सिस्टम, विफल नल-जल योजना तथा आदिम जाति सेवा सहकारी समिति शोभा में किसानों को हो रही परेशानियों पर भी गंभीर चिंता व्यक्त की गई।क्षेत्रवासियों ने कहा कि सुशासन तिहार में जिला कलेक्टर द्वारा पर्यवेक्षक त्रिलोक सेन को हटाने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई, जिससे किसानों में नाराजगी बढ़ रही है।
03 जुलाई को एसडीएम को सौंपा जाएगा ज्ञापन, 7 दिवस का अल्टीमेटम
बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि 03 जुलाई को क्षेत्र का एक प्रतिनिधिमंडल अनुविभागीय अधिकारी (एसडीएम) मैनपुर को विस्तृत ज्ञापन सौंपेंगे। ज्ञापन में मांग की जाएगी कि 7 दिवस के भीतर क्षेत्र में आकर प्रशासन ग्राम सभाओं, पेसा ग्राम सभा के अध्यक्षों, वनाधिकार समितियों, जनप्रतिनिधियों एवं क्षेत्र के प्रमुख लोगों के साथ बैठक कर समस्याओं के समाधान की दिशा में ठोस कार्यवाही सुनिश्चित करे।यदि निर्धारित समय-सीमा में समाधान की दिशा में प्रभावी पहल नहीं की गई, तो क्षेत्रवासी लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक तरीके से एसडीएम कार्यालय का घेराव करने के लिए बाध्य होंगे, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।
वक्ताओं ने रखे अपने विचार
जिला पंचायत सदस्य संजय नेताम ने कहा
हम अपने संवैधानिक अधिकारों का हनन किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं करेंगे। संविधान, पेसा अधिनियम और वनाधिकार कानून ने मूलनिवासी समाज को जो अधिकार दिए हैं, उनका पालन कराना शासन-प्रशासन की जिम्मेदारी है। संविधान और कानून केवल दिखावे के लिए नहीं बने हैं। शासन-प्रशासन को इन्हें धरातल पर लागू करना ही होगा, और जब तक ऐसा नहीं होगा, हमारा लोकतांत्रिक संघर्ष लगातार जारी रहेगा।
ग्राम पंचायत शोभा के सरपंच घनश्याम मरकाम ने कहा
क्षेत्र के विकास और समाज के अधिकारों की रक्षा के लिए हम सब एकजुट हैं। जब तक समस्याओं का समाधान नहीं होगा, संघर्ष जारी रहेगा।”
जय अंबेडकरवादी युवा संगठन के अध्यक्ष पतंग मरकाम ने कहा
शासन-प्रशासन द्वारा राजापड़ाव क्षेत्र की लगातार उपेक्षा की जा रही है। बिजली, शिक्षा, पेयजल और मूलभूत सुविधाओं के लिए वर्षों से आवेदन दिए जा रहे हैं, लेकिन धरातल पर परिणाम नहीं दिख रहा है। अब मूलनिवासी अपने अधिकारों के लिए संगठित होकर निर्णायक संघर्ष करेगा।
हजारों लोगों ने ली ऐतिहासिक शपथ
बैठक के अंत में क्षेत्रवासियों ने सामूहिक शपथ ली
हम जल, जंगल, जमीन, संविधान, पेसा अधिनियम एवं वनाधिकार कानून द्वारा प्रदत्त अधिकारों की रक्षा करेंगे। जंगलों का संरक्षण करेंगे, अपनी पारंपरिक संस्कृति और ग्राम सभा के अधिकारों की रक्षा करेंगे तथा अपने संवैधानिक अधिकारों से कभी पीछे नहीं हटेंगे।
इस बैठक में प्रमुख रूप से जिला पंचायत सदस्य संजय नेताम,शोभा सरपंच घनश्याम मरकाम,जय अंबेडकरवादी युवा संगठन के अध्यक्ष पतंग मरकाम, उपाध्यक्ष पुरुषोत्तम परदे,कोषाध्यक्ष रमेश मरकाम,प्रवक्ता पूरन मेश्राम,सचिव नकुल नागेश,रोहन नेताम,सरपंच गौरगांव चिमन नेताम,सरपंच गरहाडीह शंकर लाल नेताम,सरपंच प्रतिनिधि भूतबेड़ा टीकम मरकाम,रविन्द्र मरकाम,फलेश नेताम,अजय मरकाम, मेघनाथ,सीताराम,डिमेश्वर नेताम,गोकुल राम मरकाम, रामसिंह,मालेश्वर,राहुल निर्मलकर, कैलाश सोरी, प्रभुलाल विश्वकर्मा,जैतराम मरकाम,अर्जुन नेताम परमानंद मरकाम,विष्णु नेताम,महेश कुमार,सुंदर लाल,छबिलाल,सैतू राम नागेश, दुर्गेश कुमार पूना राम मरकाम,मया राम सहित क्षेत्र के सैकडो़ लोग बैठक में शामिल रहे।