
पुलिस के मुताबिक, जानकारी के अनुसार, आरोपी महेश सिन्हा ने नवदुर्गा उत्सव के दौरान गांव की एक महिला के घर के बाहर एक पदचिह्न बनाया था। उसने इस पदचिह्न को “माता लक्ष्मी का पदचिह्न” बताकर गांव और आसपास के क्षेत्रों में चमत्कार की अफवाह फैलाई थी।
दरअसल, जिस महिला के घर यह पदचिह्न बनाया गया था, वह आरोपी महेश की रिश्तेदार थी। गांव की एक बैठक में आरोपी और संबंधित महिला दोनों ने इस बात को स्वीकार किया था कि यह एक छल था।
50 हजार का जुर्माना लगाने पर हत्या की सोची
मृतक आंगेश्वर साहू, जो उस महिला के रिश्तेदार भी थे, ने इस पूरे प्रकरण और धार्मिक धोखाधड़ी का खुलकर विरोध किया। गांव की बैठक में आंगेश्वर के कहने पर आरोपी महेश पर 50,000 रुपए का अर्थदंड लगाया गया था। यह बात आरोपी को नागवार गुज़री और उसने आंगेश्वर की हत्या की साजिश रच डाली।
घटनाक्रम के अनुसार, 10 नवंबर सोमवार की सुबह लगभग 7 बजे आंगेश्वर साहू अपने खेत की फसल देखने साइकिल से निकले थे। जब वे देर शाम तक घर नहीं लौटे, तो परिजनों ने उनकी तलाश शुरू की। खोजबीन के दौरान खेत के पास उनकी साइकिल मिली, लेकिन आंगेश्वर का कोई पता नहीं चला।