छत्तीसगढ़ में सुभाष चंद्र बोस के पोते ने उठाए सवाल, कहा- गांधी परिवार से पूछना चाहिए वो गांधी कैसे बने

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बिलासपुर। जिले में नेता जी सुभाष चंद्र बोस के पोते सोमनाथ बोस ने सवाल उठाया है कि गांधी परिवार से पूछना चाहिए कि वो गांधी कैसे बने। उन्होंने कहा कि वो केवल महात्मा गांधी के एक ही परिवार को जानते हैं, जो बंगाल के गर्वनर बने। बोस ने कहा कि कुछ लोग आजादी से भी इसलिए जुड़े, क्योंकि उन्हें रिटर्न में कुछ पाने की उम्मीद थी और उन्हें मिला भी है।

नमो सेना इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष सोमनाथ बोस एक कार्यक्रम में शामिल होने रविवार को न्यायधानी पहुंचे थे। यहीं उन्होंने पत्रकारों से चर्चा की है। हालांकि उन्होंने गांधी परिवार(राहुल, सोनिया, इंदिरा, राजीव) का नाम नहीं लिया। मगर उन्होंने एक के बाद एक कई सवाल उठाए हैं।

बोस ने कहा-देश की आजादी में जिस परिवार और वहां के लोगों ने बलिदान दिया है। उन्होंने कभी कुछ मिलने की उम्मीद से ऐसा नहीं किया। बोस परिवार ने भी स्वतंत्रता सेनानियों को फंडिंग करना, मदद करना जैसे कई काम किए। शरद चंद्र बोस और मेरे दादा जी सुभाष चंद्र बोस ने किया। मगर हमें वापस कुछ मिलने की उम्मीद से ऐसा नहीं किया।

बोस ने कहा कि आज स्वतंत्रता दिवस के आयोजनों में केवल कुछ लोगों की तस्वीरें लगाई जाती है। जबकि बैनर में इतनी फोटो होनी चाहिए कि उस पर लिखने की जगह भी न बचे। उन्होंने कहा कि अगर आप देखें तो लाल बहादुर शास्त्री के परिवार को क्या मिला। खुद गांधी जी के परिवार को क्या मिला।

गांधी परिवार से वंश पत्रिका मांगिए

उन्होंने कहा- गांधी परिवार के वंशज जिसे मैं जानता हूं वो तो बंगाल के राज्यपाल थे। गांधी परिवार तो वही है, जो महात्मा गांधी के वंशज हैं, हम तो उन्हें ही मानते हैं। हमसे अभी पूछा जाएगा कि बोस कैसे बने तो हम वंश पत्रिका दिखा देंगे। इसी प्रकार आप गांधी परिवार से भी वंश पत्रक मांगिए।

बोस ने पत्रकारों से नेता जी के गायब होने और उनके मौते से जुड़े रहस्यों पर भी बात की। सोमनाथ ने कहा-प्लैन क्रैश जैसी कई थ्योरी इंटरनेट पर हैं। जिसके अनुसार सुभाष चंद्र बोस का प्लेन क्रैश हुआ। उनकी अस्थियां जापान में हैं, वह आज भी जीवित हैं। बाबा बनकर कहीं रहते हैं इत्यादि भ्रम और बातें फैली हुई हैं।

सोमनाथ ने कहा कि यह सब उस समय की राजनीतिक चालें थी जिससे सुभाष चंद्र बोस को उपेक्षित किया जा सके। आजादी के लिए सुभाष चंद्र बोस और उनकी आजाद हिंद सेना का बलिदान अनमोल है। आजादी के बाद वर्षों तक उन्हें और उनकी सेना को बड़ी कुर्बानी देने के बाद भी वह सम्मान नहीं मिला जो उन्हें मिलना चाहिए था

केंद्र योजनाओं को लिए काम

असल में नमो सेना इंडिया संस्था केंद्र सरकार की योजनाओं को जनता के बीच पहुंचाने का काम करती है। यह संस्था करीब 12 राज्यों में काम कर रही है। जिसमें छत्तीसगढ़,मध्य प्रदेश,उत्तर प्रदेश,दिल्ली,हरियाणा,झारखंड, उत्तराखंड, महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान, कर्नाटक, असम ,त्रिपुरा, पश्चिम बंगाल शामिल हैं।

नेता जी की मौत, आज भी रहस्य

नेताजी के निधन के 77 साल बाद भी उनकी मौत रहस्य बनी हुई है। उनकी मौत का सच जानने के लिए तीन कमेटियां बनीं। दो ने कहा- नेताजी की मौत प्लेन क्रैश में हुई। 1999 में तीसरा आयोग मनोज कुमार मुखर्जी के नाम पर बना। इस आयोग की रिपोर्ट में ताइवान सरकार के हवाले से कहा गया कि 1945 में कोई प्लेन क्रैश की घटना ही नहीं हुई। इस प्लेन क्रैश का कोई रिकॉर्ड नहीं है। हालांकि सरकार ने इस रिपोर्ट को अस्वीकार कर दिया था।

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