कोरोना का टीका लगवाने के बाद मास्क लगाने की जरूरत नहीं, वैक्सीन नए स्ट्रेन पर होगी असरदार? जानें 17 सवालों और शंकाओं के जवाब

प्रश्न 1. देश में कोरोना टीकाकरण कब शुरू होगा?

दुनिया की सबसे बड़ी टीका निर्माता कंपनी सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया की बनायी कोविशील्ड वैक्सीन को जल्द ही आपातकालीन उपयोग के लिए मंजूरी मिल गई है। सरकारी पैनल ने शुक्रवार को इसके लिए नियामक डीजीसीआई से सिफारिश कर दी है। नियामक से स्वीकृति मिलते ही भारत सरकार इस टीके की खुराकों को अपने भंडारण केंद्रों में पहुंचाना शुरू कर देगी। भारत में टीकाकरण का पूर्वाभ्यास शनिवार को हो चुका है। ऐसे में पूरी उम्मीद है कि अमेरिका और ब्रिटेन की तरह ही भारत में नियामक स्वीकृति के बाद ही टीकाकरण शुरू हो जाएगा।

प्रश्न 2. पहले चरण के टीकाकरण में किन समूहों को प्राथमिकता मिलेगी?

सरकार ने पहले पांच दिनों में सबसे पहले तीन लाख स्वास्थ्यकर्मियों को टीका देने की बात कही है। इसके बाद अगले 10 दिनों में अन्य 6 लाख फ्रंट लाइन पर काम करने वाले कर्मचारियों को भी टीका दिया जाएगा। इसके अलावा दिल्ली में 50 साल या इससे अधिक आयु वाले लोगों और पहले से दूसरी बीमारियों से पीड़ित ऐसे लोगों को भी टीका दिया जायेगा जिन्हें कोरोना से सबसे अधिक खतरा है। इसके लिए आरोग्य सेतू एप की मदद के अलावा स्वास्थ्य विभाग भी अपने स्तर पर जाकर सर्वे करेगा। इन लोगों की पहचान के बाद इन्हें कोविन एप पर जाकर पंजीकरण कराना होगा। यहां लोगों की पहचान सम्बंधी जानकारी, आयु, मेडिकल हिस्ट्री आदि जानकारी भी दर्ज की जाएगी। कोविन एप पर पंजीकरण के बाद लोगों को एसएमएस के जरिए सूचना दे दी जाएगी कि उन्हें वैक्सीन लगवाने के लिए किस बूथ पर और कब आना है।

प्रश्न 3. देश में कुल कितनी कंपनी की कोरोना वैक्सीन से टीकाकरण होगा?

देश में सबसे पहले कोविशील्ड कोरोना वैक्सीन को मंजूरी मिलने वाली है। इसके अलावा, दो अन्य टीका उम्मीदवारों के आपातकालीन मंजूरी के लिए भारतीय ड्रग नियामक के पास आवेदन किए जा चुके हैं। जिनमें भारत बायोटेक की स्वदेशी वैक्सीन कोवैक्सीन और अमेरिका-जर्मन कंपनी की बनायी कोरोना वैक्सीन फाइजर-बायोएनटेक शामिल हैं। शनिवार को कोवैक्सीन के आवेदन पर चर्चा के लिए विशेष बैठक भी हुई।

प्रश्न 4. कितनी सुरक्षित है कोरोना की वैक्सीन? इसके क्या साइड इफेक्ट सामने आए हैं। कितनी डोज लेनी जरूरी है?

एम्स के पूर्व निदेशक डॉक्टर एमसी मिश्रा के मुताबिक, वैक्सीन बनाने में 9 महीने तक का समय गया है। इस दौरान सुरक्षा की सभी शर्तों को पूरा किया जा रहा है। हर वैक्सीन में कुछ न कुछ साइड इफेक्ट होते हैं, लेकिन कोरोना की वैक्सीन में अभी तक ऐसा कोई खतरा सामने नहीं आया है। एक बार वैक्सीन लग जाए तो शुरू के सात दिन में इफेक्ट दिखना शुरू हो जाते हैं। अभी तक के सारे ट्रायल में कोई दिक्कत नहीं आई है। अभी तक जितने टीका उम्मीदवार विकास के चरण में हैं, वे सभी दो खुराकों वाले हैं। जिनमें एक खुराक के लगभग 20 से 30 दिन बाद दूसरी खुराक दी जानी है। उदाहरण के लिए, फाइजर कंपनी की कोरोना वैक्सीन की दो खुराकों के बीच 21 दिन का अंतर रखा जाता है।

प्रश्न 5. टीका लगवाने के कितने दिन के बाद शरीर में वायरस के प्रति प्रतिरोधक क्षमता पैदा होगी?

अमेरिका स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ अलबामा के मुताबिक, सामान्यत: किसी भी वैक्सीन के असर से शरीर में एंटीबॉडीज पैदा होने में दो सप्ताह या इससे अधिक वक्त लगता है। यही कारण है कि टीका लगवाने के तुरंत पहले या कुछ दिन बाद भी व्यक्ति संक्रमित हो सकता है क्योंकि उसके शरीर में तब तक एंटीबॉडीज विकसित नहीं हुई होंगी।

प्रश्न 6. कोविड-19 वैक्सीन की एक खुराक लेने से क्या शरीर को कुछ प्रतिरक्षा मिल सकती है?

ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर ने इस विकल्प की ओर दुनिया का ध्यान दिलाया, जिसे ब्रिटेन के सरकारी सलाहकार बेहद खतरनाक बताते हैं। टोनी ब्लेयर का कहना है कि अगर वैक्सीन की पहली खुराक 50 फीसदी भी असरदार साबित हो तो सबको पहले एक खुराक दे देनी चाहिए, इससे संक्रमण का खतरा घटेगा। इस बारे में ब्रिटेन की कॉमन्स साइंस एंड टेक्नोलॉजी कमेटी के प्रमुख वैज्ञानिक प्रो. विंडी बारक्ले कहते हैं कि जो टीका दो खुराकों वाला ही बनाया गया है, उसकी एक खुराक को ही पर्याप्त मान लेने के फिलहाल कोई तत्थ्य मौजूद नहीं हैं। ऐसा करना खतरनाक होगा।

प्रश्न 7. क्या देश में सभी लोगों को कोरोना वैक्सीन लगवाना अनिवार्य है?

स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, कोविड-19 के लिए टीकाकरण स्वैच्छिक है। हालांकि, इस बीमारी से सुरक्षा के लिए सरकार द्वारा तय कार्यक्रम के हिसाब से टीका लगवाने की सलाह दी गई है ताकि संक्रमण को फैलने से रोका जा सके। वैसे सरकार चाहती है कि ज्यादा से ज्यादा लोग टीका लगवाएं। विश्च स्वास्थ्य संगठन के अनुसार दुनिया की 70 फीसदी आबादी को भी टीका लग गया तो ये संतोषजनक होगा।

मिथक 1. कोरोना संक्रमित होकर ठीक हो चुके लोगों को टीके की कोई आवश्यकता नहीं होती।

सच : अब तक हुए वैज्ञानिक शोध यह साबित कर चुके हैं कि संक्रमित हुए व्यक्ति के शरीर में संक्रमण के खिलाफ प्रतिरक्षा अधिकतम तीन महीने तक ही रहती है। यही कारण है कि दुनियाभर में दोबारा संक्रमित होने के हजारों मामले आ चुके हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है कि किसी भी अन्य व्यक्ति की तरह ही कोरोना संक्रमण की जद में आ चुके लोगों को भी कोरोना का टीका लगवाना चाहिए क्योंकि यह उनके शरीर में संक्रमण के खिलाफ मजबूत स्थायी प्रतिरक्षा पैदा करने में मददगार होगा।

मिथक 2. टीका लगवाने के बाद मास्क लगाना और शारीरिक दूरी बनाकर रखने की जरूरत नहीं।

सच : यह एक मिथक है किसी भी बीमारी का एक टीका उससे बचाव की शत प्रतिशत सुरक्षा नहीं देता। हां, यह जरूर है कि वह संक्रमण की संभावना को बेहद कम कर देता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने यह सलाह जारी की है। वैश्विक निकाय का यह भी कहना है कि पूरी दुनिया को टीका नहीं लगाया जा सकता, एलर्जी से पीड़ित व एड्स या कैंसर जैसी बीमारियों के मरीजों को वैक्सीन नहीं दी जा सकती। ऐसे में जरूरी है कि टीके से महरूम रह जाने वाले इन लोगों की सुरक्षा के लिए वे लोग जरूर बचाव के नियमों का पालन करें जिन्हें टीका लग चुका है।

मिथक 3. कोरोना का टीका महिलाओं की प्रजनन क्षमता व महावारी चक्र पर असर डालता है।

सच : अभी तक इस बात के कोई प्रमाण नहीं मिले हैं कि कोरोना का टीका पुरुषों की प्रजनन क्षमता और महिलाओं के महावारी चक्र को प्रभावित करता है। हालांकि इसको लेकर अमेरिका के मियामी विश्वविद्यालय में एक शोध किया जा रहा है। इस शोध के अग्रणी वैज्ञानिक रंजीत रामास्वामी का कहना है कि हमें विश्वास है कि यह टीका पुरुषों अथवा महिलाओं की प्रजनन क्षमता पर कोई असर नहीं डालेगा पर हम इस बारे में अध्ययन करके सभी को निश्चिंत करना चाहते हैं।

मिथक 4. परीक्षण के तीसरे चरण वाले कोरोना टीके को लगवाना सुरक्षित नहीं है।

सच : यह पूरी तरह से सही नहीं है क्योंकि तीसरे चरण के परीक्षण में बहुत बड़ी संख्या में प्रयोगिक टीके का इंसानों पर परीक्षण चल रहा होता है। इस टीके को अस्थायी स्वीकृति देने के लिए नियामक संस्थाएं परीक्षण के डाटा का गहन अध्ययन करती हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन की प्रमुख वैज्ञानिक सौम्या स्वामीनाथन कह चुकी हैं कि महामारी के दौर में विकास के चरण वाले टीके का बेहद सतर्कता रखते हुए उपयोग किया जा सकता है।

मिथक 5. कोरोना के नए स्ट्रेन पर मौजूदा कोरोना वैक्सीन असरदार नहीं होंगी।

सच : अभी तक इसके कोई प्रमाण नहीं मिले हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि वायरस के अनुवांशिक गुणों में हल्का बदलाव ही हुआ है, ऐसे में वैक्सीन इस पर काम कर सकेगी। फाइजर और मॉडर्ना ने अपने-अपने टीकों के नए कोरेाना वायरस के खिलाफ प्रभावी होने का दावा भी किया है। हालांकि दोनों की कंपिनयों ने इसे लेकर अलग से परीक्षण और अध्ययन शुरू कर दिया है। टीका बनाने के बाद भी कंपनियों ने शोध कार्य बंद नहीं किया है यह लगातार जारी है ताकि वैक्सीन को अपग्रेड किया जा सके।

1. टीका लगवाने के बाद शरीर में क्या बदलाव हो सकते हैं ?

कोरोना वैक्सीन लगवाने के बाद शरीर की प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया के कारण कुछ असर दिखते हैं जो 24 घंटे के भीतर ही खत्म हो जाते हैं। जैसे कई लोगों को थकावट तो कुछ को सिरदर्द महसूस होती है। जिस बांह में सुई लगी हो, वहां सूजन आ जाती है, आदि। जिन लोगों को ट्रायल के दौरान वैक्सीन दी गई, उनमें से कुछ ने हल्की थकान की बात कही जो सामान्य दवाई से कुछ दिन में ही ठीक हो गया, ऐसे में कोई साइड इफेक्ट नहीं हुआ है। कई बार लोगों को खास तरह के भोजन के प्रति भी एलर्जी होती है लेकिन ऐसे में वैक्सीन बिल्कुल सेफ है।

2. टीका लगवा चुके लोग क्या कोरोना संक्रमण के वाहक हो सकते हैं?

जॉर्ज वॉशिंगटन विश्वविद्यालय की महामारी विशेषज्ञ लीना वेन का कहना है कि टीका लगवाने के बाद व्यक्ति के शरीर में संक्रमण के लक्षणों से सुरक्षा मिलती है। पर वह बिना लक्षण वाले संक्रमण का वाहक हो सकता है क्योंकि अभी जितने टीके तैयार किए जा रहे हैं वे संक्रमण के लक्षणों से ही सुरक्षा देते हैं। ऐसे में जरूरी है कि टीका लगवाने के बाद भी लोग मास्क पहनें।

3.कितनी प्रतिशत आबादी के टीका लगवाने के बाद हर्ड इम्यूनिटी पैदा होगी?

अमेरिकी स्वास्थ्य एजेंसी सेंटर फॉर डिसीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन ने अमेरिका के संदर्भ में जानकारी दी है कि यहां की 60 फीसदी आबादी को टीका लगने के बाद यहां हर्ड इम्युनिटी पैदा हो जाएगी। हर्ड इम्युनिटी या झुंड की प्रतिरक्षा का मतलब उस स्थिति से है जब किसी क्षेत्र में रहने वाली आबादी के एक बड़े हिस्सा के अंदर संक्रमण के प्रति प्रतिरक्षा विकसित हो जाए ताकि संक्रमण उन पर बेअसर हो जाए।

4. गर्भवती महिलाओं और बच्चों के लिए कोरोना वायरस का टीका कब तक तैयार होगा?

अभी सिर्फ वयस्कों व बुजुर्गों के लिए ही कोरोना वैक्सीन विकसित की जा रही हैं। बच्चों, किशोरों व गर्भवतियों के लिए कोरोना टीका मिलने में अभी वक्त लगेगा, जिस पर डब्लूएचओ चिंता जता चुका है। बच्चों के लिए कोरोना वैक्सीन तैयार करने के लिए अब तक तीन कंपनियों ने परीक्षण शुरू कर दिए हैं जबकि गर्भवती महिलाओं को केंद्र में रखते हुए अभी कोई टीका परीक्षण शुरू नहीं है।

5. अलग-अलग कंपनी की कोरोना वैक्सीन क्या वायरस पर एक बराबर कारगर होंगी?

सामान्यत: वैज्ञानिक मानते हैं कि किसी वैक्सीन की पहली जेनरेशन अगर 50 फीसदी भी असरदार है तो वह संक्रमण को फैलने से बचाने में मददगार होगी। इस हिसाब से फाइजर-बायोएनटेक, मॉडर्ना, ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका के कोरोना टीके 70 से 95 प्रतिशत तक असरदार साबित हो चुके हैं। 94 फीसदी असरदार साबित हो चुकी फाइजन-बायोएनटेक वैक्सीन को हाल में विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी मंजूरी दी है जो दर्शाता है कि भले अलग-अलग कंपनियों के टीकों के वायरस के सुरक्षा देने का प्रतिशत अलग-अलग रहा हो पर वे संक्रमण की संभावना को बेहद कम करने में कारगर होंगी।

स्रोत : विश्व स्वास्थ्य संगठन, एम्स, स्वास्थ्य मंत्रालय (भारत सरकार)