महिला स्व सहायता समूहों को हाईकोर्ट से राहत नही

Chhattisgarh Crimes

बिलासपुर। रेडी टू ईट सहित अन्य योजनाओं में मची लूट को देखते हुए महिला स्व सहायता समूहों से हुए अनुबंध को निरस्त करने के फैसले को चुनौती देने लगाई गई याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने राज्य शासन से जवाब तलब किया है 26 नवम्बर 2021 के आदेश को अपास्त करने लगाई गई याचिका के तारतम्य में हाईकोर्ट ने अगली सुनवाई 12 जनवरी 2022 तय की है तथा इससे पूर्व किसी भी स्व सहायता समूह को न हटाने कहा है ।

गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ शासन के आदेश दिनांक 26.11.2021 के आधार पर कई महिला स्व सहायता समूहों की ओर से हाईकोर्ट में अलग-अलग रिट याचिकाएं प्रस्तुत कर राज्य शासन के उक्त निर्णय को चुनौती देते हुए अपास्त करने की मांग की गई थी। प्रकरण में संपूर्ण सुनवाई के बाद न्यायालय ने यह व्यवस्था दी है कि चूंकि राज्य शासन इस योजना को .01.02.2022 से लागू करेगा तब तक किसी भी स्व सहायता समूह को राज्य शासन बाहर नहीं कर रही है और उन्हें तब तक कार्य करने की अनुमति शासन के निर्देशानुसार प्रदान की जाती है।

यदि शासन चाहे तो राज्य शासन एवं स्व सहायता समूहों के बीच जो अनुबंध हुए है, उन्हें अनुबंधों की शर्तो अनुसार ही उसे समाप्त कर सकता है। राज्य सरकार के उक्त निर्णय पर माननीय न्यायालय ने किसी भी प्रकार से रोक नहीं लगाया है।

राज्य सरकार अब स्वतंत्र है कि अपनी कार्रवाई, आदेश दिनांक 26.11.2021 के अनुसार कर सकती है। राज्य सरकार की ओर से महाधिक्ता सतीश चन्द्र वर्मा ने न्यायालय को यह अवगत कराया है कि महिला समूहों को जो उनका मूल कार्य है जिसमें रेडी टू इट फूड को गरम पकाना, बच्चों को वितरित करना, ट्रांसपोर्ट करना जो मूल कार्य है वह करने की अनुमति राज्य सरकार पूर्व में ही दे चुका है और उनके हितों की रक्षा राज्य सरकार कर रही है। इसलिए अंतरिम आदेश महिला स्व सहायता समूह के लोगों के पक्ष में देने की आवश्यकता नहीं है। बहरहाल अब इस मामले को राज्य शासन के जवाब के बाद दिनांक 12 जनवरी 2022 को सुनवाई के लिए तय किया गया है।