कर्मचारियों को लेकर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, किसी भी अस्पतालों में इलाज कराने पर सरकार को देना होगा मेडिक्लेम

Chhattisgarh Crimes

दिल्ली। कर्मचारियों के स्वास्थ्य को लेकर सर्वोच्च न्यायलय का एक बड़ा फैसला आया है। सुप्रीम कोर्ट ने फैसला दिया है कि कर्मचारी किसी भी अस्पताल में इलाज करा सकते हैं, जिसका मेडिक्लेम सरकार को भुगतान करना होगा। सर्वोच्च न्यायालय के इस फैसले के बाद केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स को बड़ी राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को इलाज के दायरे को सीमित नहीं किया जा सकता है. इसका मतलब ये हुआ कि केंद्रीय कर्मचारी और पेंशनर्स CGHS पैनल के बाहर के अस्पतालों में भी इलाज करा सकेंगे.

सुप्रीम कोर्ट में चली लंबी सुनवाई

ये पूरा मामला बड़ा पेचीदा है. केंद्र सरकार के एक रिटायर्ड कर्मचारी ने एक मेडिकल बिल के भुगतान की मांग की थी लेकिन सरकार मेडिक्लेम देने से इनकार कर रही थी क्योंकि पेंशनर ने CGHS पैनल के बाहर अस्पताल में इलाज कराया था. इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि आपातकालीन स्थिति में CGHS पैनल के बाहर प्राइवेट अस्पतालों में इलाज के लिए मेडिक्लेम मिलना चाहिए.

कर्मचारियों को होगा बड़ा फायदा

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से केंद्र सरकार के कर्मचारी और पेंशनर्स को बड़ा फायदा मिलेगा क्योंकि गंभीर बीमारी के इलात की स्थिति में कई बार मरीज को CGHS के पैनल के बाहर निजी अस्पतालों में इलाज कराना पड़ता है. अब ऐसा कोई भी मामला मेडिक्लेम पाने का हकदार होगा. इस फैसले से और भी कई ऐसे लोगों को राहत मिल जाएगी जिन्होंने मजबूरी में पैनल के बाहर इलाज कराया हो.

हेल्थ स्कीम का CGHS पैनल क्या है

Central Government Health Scheme को हिंदी में केंद्र सरकार की स्वास्थ्य योजना के नाम से जाना जाता है. इस योजना की शुरुआत इसलिए की गई थी ताकि केंद्रीय कर्मचारियों को इलाज के लिए इधर-उधर भटकना न पड़े. केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के तहत ये योजना चलाई जाती है. पिछले तकरीबन 60 सालों से इस योजना का लाभ केंद्रीय कर्मचारियों को मिल रहा है. समय के साथ-साथ इस योजना में बदलाव भी किया जाता है जिससे कर्मचारियों को पूरा फायदा मिल सके.