प्रधानमंत्री बोले- हम 70 हजार करोड़ का खाद्य तेल बाहर से लाते हैं, यह पैसा किसानों के खाते में जा सकता है

Chhattisgarh Crimes

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को नीति आयोग की गवर्निंग काउंसिल की छठी मीटिंग को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए संबोधित किया। इसमें राज्यों के मुख्यमंत्री, केंद्र शासित प्रदेशों (UTs) के एडमिनिस्ट्रेटर और लेफ्टिनेंट गवर्नर शामिल हुए। इस मीटिंग में मोदी का फोकस किसानों पर रहा।

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मोदी ने कहा कि हम कृषि प्रधान देश कहे जाएं, उसके बावजूद भी आज करीब-करीब 65-70 हजार करोड़ रुपए का खाद्य तेल हम बाहर से लाते हैं। ये हम बंद कर सकते हैं। हमारे किसानों के खाते में पैसा जा सकता है। इन पैसों का हकदार हमारा किसान है, लेकिन इसके लिए हमारी योजनाएं उस प्रकार से बनानी होंगी।

मोदी के भाषण की खास बातें

हमारे किसान दुनिया को भी सप्लाई कर सकते हैं

प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले दिनों हमने दालों में प्रयोग किया, उसमें सफलता मिली। दालों को बाहर से लाने में हमारा खर्च काफी कम हुआ है। ऐसी कई खाद्य चीजें बिना कारण हमारे टेबल पर आ जाती हैं। हमारे देश के किसानों को ऐसी चीजों के उत्पादन में कोई मुश्किल नहीं है। थोड़ा गाइड करने की जरूरत है और इसके लिए ऐसे कई कृषि उत्पाद हैं जिन्हें किसान न सिर्फ देश के लिए पैदा कर सकते हैं, बल्कि दुनिया को भी सप्लाई कर सकते हैं। इसके लिए जरूरी है कि सभी राज्य अपनी एग्रो क्लाइमेटिक रीजनल प्लानिंग की स्ट्रैटजी बनाएं। उसके हिसाब से किसान को मदद करें।

कृषि एक्सपोर्ट बढ़ा, लेकिन हमारा पोटेंशियल कहीं ज्यादा

मोदी ने कहा कि बीते वर्षों में कृषि से लेकर पशुपालन और मत्स्यपालन तक एक होलिस्टिक अप्रोच अपनाई गई। इसका परिणाम है कि कोरोना के दौर में देश में कृषि निर्यात में काफी बढ़ोतरी हुई है, लेकिन हमारा पोटेंशियल इससे कहीं अधिक ज्यादा है। हमारे प्रोडक्ट्स का वेस्टेज कम से कम हो, इसके लिए स्टोरेज और प्रोसेसिंग पर भी ध्यान देने की जरूरत है।

केंद्र-राज्य मिलकर काम करें

मोदी ने कहा कि देश की प्रगति का आधार है कि केंद्र और राज्य साथ मिलकर कार्य करें और निश्चित दिशा में आगे बढ़ें। को-ऑपरेटिव फेडरलिज्म को और अधिक सार्थक बनाना और यही नहीं हमें प्रयत्नपूर्वक कॉम्पीटीटिव, को-ऑपरेटिव फेडरलिज्म को न सिर्फ राज्यों के बीच बल्कि ड्रिस्ट्रक्ट तक ले जाना है।

प्राइवेट सेक्टर की ऊर्जा का सम्मान करना है

प्रधानमंत्री ने कहा कि इस साल के बजट पर जो पॉजिटिव रिस्पॉन्स आया, उससे मूड ऑफ नेशन का पता चलता है। युवा अब समय नहीं गंवाना चाहते। प्राइवेट सेक्टर विकास यात्रा में और आगे आ रहा है। सरकार के नाते प्राइवेट सेक्टर की ऊर्जा का सम्मान भी करना है और उसे आत्मनिर्भर भारत में उतना ही अवसर भी देना है।आत्मनिर्भर भारत एक ऐसे भारत की तरफ कदम है, जहां हर व्यक्ति को पूरी ऊर्जा के साथ आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा। हम केवल अपने लिए नहीं, विश्व के लिए उत्पादन करेंगे। इसके लिए हमें इनोवेशन को बढ़ाना होगा, शिक्षा के नए मौके देने होंगे।

‘1500 कानून खत्म किए’

मोदी ने रिफॉर्म्स पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि हाल ही में ऐसे कई रिफॉर्म्स किए गए हैं, जो सरकार का दखल कम करते हैं। हमने 1500 कानून खत्म किए हैं। मैंने कहा है कि कंप्लायंस की संख्या कम हो। मैं दो चीजों का आग्रह करता हूं। आज हमें अवसर मिला है। इसमें ईज ऑफ डूइंग बिजनेस की कोशिश रहनी चाहिए। इसके लिए कानूनों और व्यवस्थाओं में सुधार करना होगा। देश के लोगों के लिए ईज ऑफ लिविंग बिजनेस के लिए काम करना होगा। आपकी तरफ से देश को आगे ले जाने वाले विचारों का स्वागत रहेगा।