आदिवासी बालक छात्रावास मैनपुर मे कीचन का धुंआ भरने से बच्चो को घुटन और सांस लेने मे हो रही तकलीफ

Chhattisgarh Crimes युमेन्द्र कश्यप/मैनपुर। तहसील मुख्यालय मैनपुर स्थित प्री-मैट्रिक आदिवासी बालक छात्रावास इस समय बुनियादी सुविधाओं के गंभीर संकट से जूझ रहा है सन 1980 के जर्जर भवन में संचालित इस छात्रावास में रहने वाले मासूम आदिवासी छात्र रोज समस्याओं के बीच पढ़ाई करने को मजबूर हैं। मैनपुर मे सन् 1968 मे प्री मैट्रिक आदिवासी बालक छात्रावास प्रारंभ किया गया है और आज से 56 साल पहले भवन निर्माण किया गया है यह भवन बेहद जर्जर हो गया है और तो और इस भवन मे सबसे ज्यादा परेशानी रसोई और बच्चो का कमरा एक साथ लगा हुआ है रसोई का धुंआ बच्चो के कमरे मे भर जाता है जिसके चलते पूरे कमरे चारो तरफ काला हो गया है और यहां निवास करने वाले बच्चों को धुंए से भारी परेशानी हो रही है। छात्रावास में रसोई से धुआं निकलने की कोई समुचित व्यवस्था चिमनी नहीं है जब भी रसोई में खाना बनता है, पूरा धुआं छात्रों के अध्ययन और शयन कक्षों में भर जाता है इसके चलते बच्चों को आंखों में जलन, घुटन और सांस लेने में भारी तकलीफ का सामना करना पड़ रहा है।

तीन साल से अधूरा पड़ा है किचन शेड, निर्माण कार्य ठप्प–

हैरानी की बात यह है कि भोजन पकाने के लिए 3 साल पहले नए किचन शेड का निर्माण कार्य शुरू किया गया था, जो आज तक अधूरा पड़ा है ठेकेदार और जिम्मेदार अधिकारियों की उपेक्षा के कारण काम ठप्प है, और बच्चे आज भी पुराने, जर्जर व असुरक्षित कमरे में खाना बनते देखने को मजबूर हैं। धुएं के अलावा छात्रावास में बिजली की लगातार कटौती से पढ़ाई प्रभावित हो रही है वहीं, शौचालय रखरखाव के अभाव में बदहाल हो चुका है गंदगी और दुर्गंध के कारण छात्र गंभीर बीमारियों की आशंका से सहमे हुए हैं।

अधिकारियों के दावों के बीच पिस रहा बचपन – 56 साल पुराने इस जर्जर भवन की मरम्मत और बुनियादी सुविधाओं को दुरुस्त करने के लिए कई बार ध्यानाकर्षण कराया जा चुका है, लेकिन प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। सवाल यह उठता है कि आखिर कब तक ये आदिवासी छात्र इस बदहाल व्यवस्था के साए में अपना भविष्य गढ़ने को मजबूर रहेंगे?

मैदान में भरा पानी, संक्रामक बीमारियों का बढ़ा खतरा- समस्याएं यहीं खत्म नहीं होतीं; छात्रावास के ठीक सामने बने मैदान में जलजमाव हो गया है। बारिश के दिनों में यह मैदान कीचड़ और पानी से भर जाता है, जिससे बच्चों को आने-जाने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। जगह-जगह रुके गंदे पानी और बदहाली के कारण अब इलाके में डेंगू, मलेरिया जैसी संक्रामक बीमारियां फैलने का गंभीर अंदेशा बना हुआ है।

31 छात्र अध्ययनरत है – इस आदिवासी बालक छात्रावास की कुल शीट 20 है लेकिन यहां छठवीं से दसवीं तक के 31 छात्र निवास कर अध्ययनरत है कमरो के भीतर बिजली की बेहद अभाव बना हुआ है और रात को अचानक बिजली बंद हो जाने पर कोई वैकल्पिक व्यवस्था भी नही है कीचन मे पानी टपक रहा है जिसके कारण यहां खाना बनाना भी बहुत मुश्किल हो रहा है।

अधीक्षक ने बताया – अधीक्षक चन्द्रकिशोर बघेल ने बताया कीचन निर्माण कार्य तीन वर्ष से अधूरा है और अतिरिक्त कमरा निर्माण कार्य भी बंद पड़ा हुआ है यदि इसका निर्माण हो जाये तो छात्रो को सुविधा होगी उन्होने बताया धुंए के कारण बच्चो को परेशानी हो रहा है कई बार इसकी जानकारी दिया जा चुका है।

Exit mobile version