अलग खबर; राष्ट्रपिता के अंग रक्षक रहे स्वतंत्रता संग्राम सेनानी पंडित श्यामशंकर मिश्र की मूर्ति पिछले तीन वर्षो से कर रही है अनावरण का इंतजार

सेनानी के परिवार ने मुख्यमंत्री से भेंट कर स्वतंत्रता संग्राम सेनानी की मूर्ति के अनावरण करने किया मांग

पूरन मेश्राम / छत्तीसगढ़ क्राइम्स

Chhattisgarh Crimes
मैनपुर । स्वतंत्रता संग्राम सेनानी पंडित श्यामशंकर मिश्र के परिवार ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से भेंट कर स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के मूर्ती के अनावरण करने का निवदेन किया जिस पर मुख्यमंत्री ने कहा है कि देवभोग दौरे में पंडित श्यामशंकर मिश्र जी के मुर्ति का अनावरण करेंगें। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्व.पंडित श्याम शंकर मिश्र जी की मूर्ति स्थापना सत्र 2018 में गांधी चौक तथा शासकीय महाविद्यालय पंडित श्याम शंकर मिश्र देवभोग में किया गया है, लेकिन आज पर्यंन्त मूर्ति का अनावरण नहीं हो सका । स्वतंत्रता संग्राम सेनानी संगठन छत्तीसगढ़ परिवार व क्षेत्रवासियों के लगातार प्रयास से अब मूर्ति अनावरण करने का सपना पूरा होते दिख रहा है ।

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स्वतंत्रता संग्राम सेनानी संगठन छत्तीसगढ़ लगातार स्वतंत्रता सेनानियों के हक व सम्मान के लिए प्रयासरत है आगामी दिनों में गरियाबंद जिले में प्रस्तावित मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के भेंट मुलाकात कार्यक्रम के दौरान देवभोग आने की भी आशंका जताई जा रही है स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के परिवार व क्षेत्रवासीयों की मांग है कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के करकमलों से पं.श्यामशंकर मिश्र जी के विगत 3 वर्षों से निर्मित मूर्ति का अनावरण कर स्वतंत्रता संग्राम सेनानी को उचित सम्मान दिया जाये।

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राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के रह चूके है अंग रक्षक

स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्व.श्री पंडित श्याम शंकर मिश्र जी का देश की आजादी के आंदोलन में सक्रिय रूप से भागीदारी रही व गाँधी जी के विश्वसनीय अंग रक्षक रहे सर्वप्रथम 6 महीना की सजा हुई और जमानत के लिए 100 रुपये जुर्माना नही पटाने के एवज में 2 महीने की सजा हुई जब वर्धा आश्रम में विदाई के समय भेंट स्वरूप गाँधी जी के खुद के हाँथो से बनाये हुए खादी वस्त्र व कमर घड़ी भेंट स्वरूप दी गई थी,एंव वादा करते हुए कहा था कि मैं देवभोग जरूर आऊँगा। पण्डित श्याम शंकर मिश्र का देश के प्रति दिया गया योगदान सराहनीय है जो कभी नही भुलाया जा सकता है जिसके स्मृति में देवभोग के हृदय स्थल पर स्थित विगत 3 वर्ष पहले शहीद स्मारक में पंडित श्याम शंकर मिश्र जी कि मूर्ति स्थापना किया गया है।

पंडित श्याम शंकर मिश्र बचपन से ही राष्ट्रीय प्रेम से ओत-प्रोत थे पंडित श्याम शंकर मिश्र गांधी जी के विश्वसनीय कार्यकर्ता थे, त्रिपुरा कांग्रेस सम्मेलन जबलपुर में गांधीजी के अंगरक्षक थे आंदोलन के वक्त गांधी जी के नेतृत्व में जगह-जगह मीना बाजार खोले गए थे, रायपुर में पंडित श्याम शंकर मिश्र को मीना बाजार प्रभारी पद पर नियुक्त किया गया था, तत्पश्चात गांधी जी ने इन्हें अपने साथ वर्धा आश्रम ले गए वहाँ गांधी जी के साथ एक माह रहे, पंडित श्याम शंकर मिश्र को विदाई देते हुए अपने हाथ से निर्मित खादी के पोशाक भेंट किया था। महात्मा गांधी द्वारा दी गई कमर घड़ी आज भी उनके पौत्र स्वर्गीय राजेश पांडे के बाद इनके पुत्र अभिषेक पांडे के पास सुरक्षित है।

सेनानी का परिवार शहीद स्मारक का अनावरण करवाने कई बार मंत्री उच्च अधिकारियो से लगा चुके है गुहार

स्वतंत्रता सेनानी पंडित श्याम शंकर मिश्र के स्मृति के रूप में देवभोग के ह्रदय स्थल पर शहीद स्मारक का निर्माण किया गया, लेकिन दुर्भाग्य की बात यह है कि आज तक गांधीजी के साथी पंडित श्याम शंकर मिश्र का शहीद स्मारक अनावरण को तरस रहा है। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी का परिवार शहीद स्मारक के अनावरण कराने हेतु शासन प्रशासन के चक्कर काटते अब तलक बाट जोह रहा हैं। अनावरण हेतु राज्यपाल, मंत्री गण, उच्च प्रशासनिक अधिकारी के पास जाते-जाते अनावरण हेतु गुहार लगाते सालों बीत गए किंतु अब तक स्वतंत्रता संग्राम सेनानी पंडित श्याम शंकर मिश्र का शहीद स्मारक अनवरण को तरस रहा है।

सेनानी के परिवार शहीद स्मारक का अनावरण नही होने से दुखी है

स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के परिवार काफी दुखी हैं नम आंखों से दुख जताते हुए कहते हैं कि क्या स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के शहीद स्मारक का अनावरण करना या कराना इतना कठिन है। क्या स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की कहानी, योगदान, उपलब्धि, सहायता, सहयोग की कहानी इतिहास के पन्नों से सरकारी दफ्तर तक सिमट कर रह गया है। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी पंडित श्याम शंकर मिश्र के परिवार व क्षेत्रवासी चाहते हैं कि शहीद स्मारक का अनावरण जल्द से जल्द मुख्यमंत्री के कर कमलों से हो क्योंकि आगामी दिनों में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के आगमन की खबर सुनकर परिवार व क्षेत्रवासियों में आस की लहर दौड़ रही है, उम्मीद है कि शहीद स्मारक का अनावरण हो।