रोमांचक व मनमोहक है कुलाप जल प्रपात, गरियाबंद जिले के सबसे बड़े जल प्रपात तक पहुंचना है कठिन

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पूरन मेश्राम/ छत्तीसगढ़ क्राइम्स

मैनपुर। वैसे तो गरियाबंद ज़िला पर्यटन के दृष्टिकोण से काफी प्रसिद्ध हैं , यहां प्रकृति ने अपनी खूबसूरत छठा बिखेरा है ,यहां कल कल बहती जलप्रपात बरबस ही पर्यटकों का ध्यान अपनी और खींचती हैं यही कारण है कि हर वर्ष खासतौर पर वर्षा ऋतु और उसके बाद बड़ी तादाद में सैलानी यहां आते हैं और यहां के प्राकृतिक सुंदरता को देख मंत्रमुग्ध हो जाते हैं।

अभी तक आपने घटारानी और जतमई जलप्रपात को ही देखा और सुना है चलिए आज हम आपको गरियाबंद जिले के सबसे बड़े जलप्रपात के बारे में बताते हैं जहां पहुंचना काफी चुनौतियों से भरा हैं अगर आप रास्तों और जंगलों से अनभिज्ञ है तो यहां जाने की गुस्ताखी भूल से भी नहीं करना क्योंकि यहां जांगली जानवरों के डर के साथ फिसलन भरी पगडंडियों से गुजर कर ही पैदल पहुंचा जा सकता है जी हां हम बात कर रहें हैं, गरियाबंद जिले के अंतर्गत तहसील मुख्यालय मैनपुर से लगभग 30-35 किलोमीटर दूर बीहड़ जंगल और पहाड़ी के ऊपर से गिर रहे कुलाप जल प्रपात की जो जंगलों और पहाड़ों के बीच अपनी अद्भुत छठा बिखेर रहा है।

सिकासार जलाशय के ऊपर लगभग 350 मीटर की ऊंचाई से गिरने वाला यह जलप्रपात क्षेत्र के प्रसिद्ध जलप्रपातो में जाना जाता है। बारिश के दिनों में इस जलप्रपात की सुंदरता बेहद खूबसूरत और रोमांचक भरा होता है। काफी ऊंचाई से कल कल की ध्वनि करते सिकासार जलाशय के ऊपर गिर रहे कुलाप जलप्रपात को देखने का एक अलग ही आनंद है। इसे सिकासार जलाशय में पहुंचने वाले सैलानी और पर्यटक सिकासार जलाशय से देखते हैं। मन को सम्मोहित और सुकून प्रदान करने वाले इस जलप्रपात को सिकासार जलाशय से घंटों पर्यटक निहारते हैं। बारिश के दिनों में ही कुलाप जलप्रपात देखने लायक रहता है। लगभग 350 फीट से 500 फीट की गहराई में गिरने वाला यह जलप्रपात क्षेत्र के सबसे बड़ा जलप्रपात है।

चुनौती से भरा है यहां पहुंचना

यहां पहुंचने के लिए दो मार्ग हैं पहला मार्ग सिकासार जलाशय से नाव के माध्यम से तथा दूसरा मार्ग 6 किलोमीटर दुर्गम पहाड़ी रास्तों को पैदल तय कर ही पहुंचा जा सकता है। सिकासार जलाशय के भरे पानी को लगभग 7 से 8 किलोमीटर नाव से पार कर यहां पहुंचा जाता है। इस दुर्गम स्थान में पहुंचे कुछ युवा साथी व प्राकृतिक प्रेमियों ने छत्तीसगढ़ क्राइम्स को तस्वीरें उपलब्ध कराते हुए बताया कि वर्तमान में कुलाप जलप्रपात तक पहुंचना काफी चुनौती भरा काम है। वहां जाने के लिए किसी को भी सलाह नहीं दिया जाता।

मुख्य मार्ग से ऐसे ही नजारा देखकर पर्यटक आनंद ले। वहां तक पहुंचे युवाओं ने बताया कि अत्यधिक दुर्गम रास्ता पहाड़ी नदी नालों परेशानियों को पार कर यहां पहुंचा जाता है। उन्होने बताया कि सबसे पहले तो यहां पहुंचने के लिए कोई सड़क नहीं है, घने जंगलों पहाड़ों को पार करते हुए यहां पहुंचा जाता है, और इस बियाबान जंगल में अनेक प्रकार के जंगली जीव जंतुओं के साथ हाथी प्रभावित क्षेत्र भी है। जिसके कारण इस जलप्रपात में बहुत कम लोग ही पहुंच पाते हैं।

कुलाप जलप्रपात पहुंचने का रास्ता धवलपुर जरण्डीह, टोरीभूई से 15 किलोमीटर दूर लगभग 6 किलोमीटर दुर्गम जंगलों और पहाड़ों को पार कर पहुंचा जा सकता है।