कैंसर बीमारी को लेकर कई तरह की भ्रांतियां, जागरूकता हो तो जंग जीतना आसान

Chhattisgarh Crimes

रायपुर। हर वर्ष चार फरवरी को विश्व कैंसर दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस दिवस को मनाने का उद्देश्य कैंसर से बचाव और उसके प्रति जागरूकता पैदा करना है, ताकि समय रहते लोग इसको पहचान सकें और त्वरित उपचार कराया जा सके। कैंसर के बारे में लोगों के मन में अनेक भ्रांतियां हैं। इन भ्रांतियों से संबंधित तथ्य नेशनल इंस्टीट्यूट आफ कैंसर प्रिवेंशन एंड रिसर्च ने जारी किए हैं।

आप भी जानिए किस तरह की हैं भ्रांतियां और सच्चाई

भ्रांति : कैंसर एक संक्रामक बीमारी है।
तथ्य : कैंसर संक्रामक बीमारी नहीं है। कुछ कैंसर बैक्टीरिया और वायरस जनित होते हैं, जैसे सर्वाइकल कैंसर ह्यूमन पैपिलोमावायरस, लिवर कारक कैंसर हिपेटाइटिस बी और सी।

भ्रांति : अगर व्यक्ति के परिवार में किसी को कैंसर नहीं है या पहले किसी को नहीं हुआ तो उसको भी कैंसर नहीं होगा।
तथ्य : यह जरूरी नहीं है। केवल पांच से 10 फीसद कैंसर आनुवंशिक होते हैं, जबकि कुछ कैंसर व्यक्ति के पूरे जीवन में जेनेटिक परिवर्तनों के कारण होते हैं और कुछ पर्यावरण के कारण। जैसे रेडिएशन और खाने की आदतों जैसे तंबाकू का सेवन से होते हैं।

भ्रांति : परिवार में किसी को कैंसर हुआ है तो आपको कैंसर अवश्य होगा।
तथ्य : परिवार में कैंसर होना उसके सदस्यों में कैंसर को विकसित करने की आशंका को बढ़ा देता है। केवल पांच से 10 फीसद कैंसर जींस में हानिकारक म्यूटेशन के कारण होते हैं, जो व्यक्ति को उसके पूर्वजों से मिलते हैं ।

भ्रांति : सकारात्मक विचार रखने से कैंसर से आप बच जाएंगे।
तथ्य : सकारात्मक विचार आपके जीवन की गुणवत्ता को तो बढ़ा सकते हैं, लेकिन इसका ऐसा कोई वैज्ञनिक प्रमाण नहीं है जिससे यह पता चले की इससे कैंसर का उपचार होता है।

भ्रांति : यदि व्यक्ति को कैंसर हुआ है तो उसकी मृत्यु शीघ्र हो जाएगी।
तथ्य : ऐसा नहीं है, यदि प्रारंभिक स्टेज में कैंसर की पहचान हो जाती है तो बचाव की दर बढ़ जाती है। वास्तव में बहुत से लोग पांच साल या उससे भी अधिक वर्ष तक जीवित रहते हैं, जिनमें कैंसर की पहचान जल्द हो जाती है ।

भ्रांति : बुजुर्ग लोगों के लिए कैंसर का इलाज उपयुक्त नहीं है।
तथ्य : ऐसा नहीं है, वास्तविकता यह है कि कैंसर के इलाज की कोई आयु सीमा नहीं है।

भ्रांति : सेल फोन और सेल फोन के टावर्स कैंसर फैलाते हैं।
तथ्य : यह भी विवादित है कि सेल फोन के टावर्स से निकलने वाले रेडिएशन से कैंसर होता हैं। कैंसर जींस में म्यूटेशन के कारण होता है। सेल फोन से लो फ्रीक्वेंसी ऊर्जा की किरणें निकलती हैं, जो कैंसर का कारण नहीं हैं।

भ्रांति : हर्बल उत्पादों से कैंसर का इलाज होता है।

तथ्य : कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली कीमोथेरेपी के साइड इफ्केट्स में हर्बल उत्पादों के उपयोग की सलाह दी जाती है, लेकिन ऐसा कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है जिसमें कैंसर के इलाज में हर्बल उत्पाद का उपयोग होता है।

भ्रांति : हेयर डाई और एंटीपर्सपिरेंट्स से कैंसर हो सकता है।
तथ्य : ऐसे कोई वैज्ञानिक साक्ष्य नहीं है, जिनसे यह ज्ञात हो कि उपरोक्त पदार्थ कैंसर के विकास में खतरा है।

भ्रांति : कृत्रिम स्वीटनर, फ्लेवर्स, खाने में डाले जाने वाले रंग वाले पदार्थ के उपयोग से कैंसर हो सकता है।
तथ्य : शोधों से ऐसे कुछ परिणाम सामने नहीं आए हैं, जिनसे यह पता चले कि उपरोक्त पदार्थों से कैंसर हो सकता है।

भ्रांति : कैंसर दर्द देता है।
तथ्य : अगर कैंसर के बारे में प्रारंभ में ही पता चल जाता है तो यह कष्टदायी नहीं होता है। अधिकांश केस में कैंसर संबंधित दर्द का इलाज दवाइओं और दर्द प्रबंधन विधियों से किया जाता है।

भ्रांति : कैंसर से ठीक हुए लोग सामान्य गतिविधियों में प्रतिभाग नहीं कर सकते हैं।
तथ्य : कैंसर के रोगियों को कुछ समय के लिए ही अस्पताल में रहना पड़ता है। वह अपने सभी कार्यों को कर सकते हैं, यहां तक कि इलाज के दौरान भी वह अपने सामान्य गतिविधियों को कर सकते हैं।