
दंतेवाड़ा। अश्विन शुक्ल पक्ष नवरात्र के पंचमी के खास मौके पर आज आदि शक्ति मां दंतेश्वरी के मंदिर में मां दुर्गा के पांचवे रूप स्कंदमाता की विधि विधान से पूजा अर्चना की गई। पंचमी के विशेष मौके पर मां के दर्शन करने दंतेश्वरी मंदिर में श्रद्धालुओं का हुजूम उमड़ पड़ा था । हजारों की तादात में भक्त मां के दर्शन पाने घण्टों कतार में खड़े रहे। भोर से ही भक्त लाइनों में खडे हो गए थे। दिन चढ़ते ही दर्शनार्थियों की भीड़ इस कदर उमड़ी कि कतार जयस्तंभ चौक को भी पार करते हुए नगर के नारायण मंदिर के उस पार पहूंच गई थी। आस्था की नगरी में चारों तरफ माता की जयघोष से पूरा शक्तिपीठ गूंजायमान हो रहा है।

नवरात्र के पहले दिन से ही माता दंतेश्वरी के मंदिर में हर रोज श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है। आज पंचमी पर मां दंतेश्वरी मंदिर में मां दुर्गा के पंचम रूप स्कंदमाता की विधि-विधान से पूजा अर्चना हुई। तत्पश्चात विशेष मंत्रोच्चार के साथ हवन-अनुष्ठान भी हुआ। मंगलमय मनोकामना के साथ सैकड़ों हाथों ने हवन कुण्ड में आहुति दी। मां दुर्गा भगवान स्कन्द कुमार कार्तिकेय के नाम से भी जाने जाते हैं । इन्हीं भगवान स्कंद अर्थात कार्तिकेय की माता होने के कारण मां दुर्गा के इस पांचवें स्वरूप को स्कन्दमाता के नाम से जाना जाता है । इनकी उपासना नवरात्रि पूजा के पांचवें दिन की जाती है इस दिन साधक का मन विशुद्ध चक्र में स्थित रहता है इनका वर्ण शुभ्र है ।
ये कमल के आसन पर विराजमान हैं इसलिए इन्हें पदमासन देवी भी कहा जाता है । इनका वाहन भी सिंह है । नवरात्र के पंचमी पर आज देवी दर्शन का सिलसिला सुबह 4 बजे से प्रारंभ हो गया था। मंदिर के पट खुलते ही श्रद्धालुओं का रैला उमड़ पड़ा। बता दें कि चतुर्थी की रात से ही लाखों की संख्या में श्रद्धालु दंतेवाड़ा पहूंच चुके थे। रात 11 बजे से ही लोग मंदिर के सामने लाइन लगाकर वहीं लेट गए थे। नगर में जगह जगह बने भी पदयात्री विश्राम स्थल भी श्रद्धालुओं से पटे पड़े थे। जिसे जहां जगह मिला लेटकर आराम कर रहा था। सुबह 4 बजे पट खुलते ही श्रद्धालुओं की लंबी लंबी कतारें लगनी शुरू हो गई। सुबह 8 बजे तक भक्तों की कतार 1 किमी लंबी हो गई थी। करीब एक किमी की दोहरी लंबी लाईन में श्रद्धालु तपती धूप होने के बावजूद माता के दर्शन करने प्रतिक्षा में खडे रहे।
कुछ भक्तों से पुछा भी गया कि आप लोग इतने दूर से नंगे पांव आए हो क्या आप लोगों को थकान महसूस हो रही है तो अधिकांश श्रद्धालुओं ने एक ही बात कही की हमें किसी प्रकार का कष्ट नहीं हो रहा है बल्कि हमें तो यह एहसास भी नहीं हुआ है कि हमने सैकडों किलोमीटर पैदल चल लिया है । यह सब मां दुर्गा का आशीर्वाद है कि हम यहां तक पहूंचकर उनके दर्शन के लिए आज माता के दरबार में खड़े हैं । लोग मन्नत अनुसार पैदल, बैठकर, घुटनों के बल मां के दर्शनार्थ पहुंच रहे हैं । गत वर्ष की अपेक्षा इस वर्ष श्रद्धालुओं की संख्या में बढोत्तरी हुई है। एक अनुमान के मुताबिक पंचमी पर आज करीब 50 हजार से ज्यादा भक्तों ने मां दंतेश्वरी के मंदिर पहुंच दर्शन किया।
कल चतुर्थी पर भी लाखों भक्तों ने मां के दर्शन किए। भक्तों की भीड़ को व्यवस्थित करने पुलिस को खासी मशक्कत करनी पड़ी। भीड़ को नियंत्रण रखने मंदिर के भीतर-बाहर जवान पूरी तरह से मुस्तैद दिखे। जवानों के साथ-साथ स्काउट गाइड व एनसीसी के स्कूली बच्चों ने भी भीड़ में नियंत्रण पाने काफी पसीना बहाया। पंचमी पर प्रशासन व टेम्पल कमेटी की ओर से तो श्रद्धलुओं के लिए कुछ खास सुविधा नहीं दी गई है परन्तु अन्य समाज सेवी संगठन, व्यापारी संघ ने जगह जगह स्टाल व लंगर लगाकर भक्तों के लिए भोजन व जलपान का प्रबंध अवश्य किया है जो प्रशंसनीय है । पदयात्रियों के पहुंचने का सिलसिला अब भी अनवरत जारी है। देवी मंदिरों में देर रात तक जसगीत व भजन कीर्तन व अन्य आध्यात्त्मिक र्कायक्रम भी हो रहे हैं।
पटसार पहुंची माईजी की डोली
शारदीय नवरात्र के पांचवे दिन पंचमी के अवसर पर भैरवबाबा से अनुमति मिलने के बाद बस्तर दशहरा में शामिल होने आदि शक्ति मां दंतेश्वरी की डोली अपना स्थान छोड़ पटसार पहुंचती है। इसी परंपरा को निभाते हुए मंदिर के मुख्य पुजारी द्वारा आज माता की डोली को परंपरानुसार पंचमी की सुबह विशेष पूजा अर्चना के बाद चंदन घीसकर कपड़े से बनी मूर्ति को डोली में विराजा गया। तत्पश्चात छत्र व त्रास के साथ डोली को गर्भ-गृह से बाहर पटसार में विधिवत पूजा अनुष्ठान के बाद लाकर रखी गई। सेवादारों ने बताया कि पंचमी में परंपरानुसार माई की डोली पटसार लाई जाती है। डोली तीन दिन बाद अष्टमी में विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरा में शामिल होने जगदलपुर रवाना होगी। रास्ते में आंवराभाटा, डिलमिली में देवी विश्राम करेंगी। डोली के साथ पुजारी, मांझी, मुखिया, समरथ, सेठिया, नाईक आदि सेवादार भी रवाना होंगे।