
रायपुर। अक्सर देखा गया है कि कुछ लोग RTO सम्बंधित काम को करवाने के लिए दलालों के चक्कर में पड़ जाते हैं, जिसकी वजह से कई बार उन्हें लम्बा-चौड़ा चूना भी लग जाता है। लोगों को इन्हीं तरह की समस्याओं से निजात दिलाने के लिए परिवहन विभाग ने एक अच्छी पहल है। तो चलिए जानते हैं।
परिवहन विभाग की इस पहल के तहत अब सेकंड हैंड गाड़ियों की खरीद-बिक्री के लिए आरटीओ दफ्तर जाने की जरूरत नहीं होगी। परिवहन विभाग सोमवार से आधार ऑथेंटिकेशन नाम से योजना शुरू कर रहा है। इसके तहत खरीद-बिक्री करने वाले अपने नजदीकी परिवहन सुविधा केंद्र जाएंगे और आसानी से नाम ट्रांसफर करा सकेंगे।
इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि नाम ट्रांसफर के खेल में दलालों की सक्रियता कम हो जाएगी। अभी जानकारी के अभाव में ज्यादातर लोग दलालों के चक्कर में फंसते हैं और दलाल मोटी रकम ऐंठते हैं। परिवहन अफसरों की मानें तो इसकी तैयारी पूरी कर ली गई है। इस नई व्यवस्था के शुरू होने से लोगों को सीधा लाभ मिलेगा। अभी जितना पैसा नाम ट्रांसफर में लग रहा है, उसमें 100 रुपए एक्स्ट्रा लगेंगे।
अभी कोई दफ्तर जाकर नाम ट्रांसफर कराने पर अलग अलग गाड़ियों का अलग अलग चार्ज लगता है। टू व्हीलर गाड़ियों का 400 रुपए लगता है। लाइट मोटर व्हीकल का 550 रुपए और थ्री व्हीलर का 750 रुपए देना पड़ता है। लोग दलालों के चक्कर में पड़कर 2000 रु तक अतिरिक्त वसूल लेते हैं, लेकिन अब यही काम 100 रुपए देकर सेवा केंद्र से कराया जा सकेगा। इससे समय भी बचेगा और पैसे भी।
आरटीओ के आंकड़ों के मुताबिक प्रदेश में हर साल दो लाख से ज्यादा सेकंड हैंड गाड़ियां खरीदी और बेची जाती हैं। इन गाड़ियों का रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट ट्रांसफर करना होता है। यह काम बेहद झंझट भरा होता है। बता दें जब तक गाड़ी की ओनरशिप अपने नाम ट्रांसफर नहीं करते, तब तक उस गाड़ी के मालिक नहीं कहे जाते हैं।
यदि आप पुरानी कार या बाइक खरीद या बेच रहे हैं, तो उसके लिए रजिस्ट्रेशन ट्रांसफर करना जरूरी होता है। हालांकि आरसी ट्रांसफर करना आसान नहीं होता। इसके लिए कई बार आरटीओ ऑफिस के चक्कर लगाने पड़ते हैं। इसलिए परिवहन विभाग इसे सरल बनाने के लिए आधार ऑथेंटिकेशन शुरू कर रहा है।
प्रदेशभर में परिवहन विभाग ने 500 सुविधा केंद्र तो वहीं रायपुर जिले में करीब 50 सुविधा केंद्र खोले हैं। वर्तमान में यहां परिवहन संबंधित कामों के लिए ऑनलाइन फार्म भरने का काम किया जाता है। विभाग अब इन सेवा केंद्रों पर आधार ऑथेंटिकेशन शुरू कर रहा है। यहां क्रेता- विक्रेता को ओरिजनल आधार कार्ड ले जाना पड़ेगा।
सेवा केंद्र में बैठा कर्मचारी परिवहन विभाग के सॉफ्टवेयर में गाड़ी नंबर और मालिक के नाम की जांच करेगा। सही पाए जाने पर वहीं से गाड़ी का नाम तुरंत ट्रांसफर हो जाएगा। अधिकारी का कहना है कि गाड़ी मालिक को कार्यालय का चक्कर न लगाना पड़े, इसलिए प्रक्रिया को सरल किया जा रहा है।