
गुरुवार, 18 दिसंबर को रात 10 बजे पुलिस नियंत्रण कक्ष भिलाई में एक विशेष सम्मान समारोह आयोजित किया गया। इसमें विभिन्न गंभीर मामलों में उत्कृष्ट विवेचना करने वाले पुलिस अधिकारियों को सम्मानित किया गया।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, दुर्ग ने निरीक्षक, उप निरीक्षक और सहायक उप निरीक्षक स्तर के अधिकारियों को प्रशस्ति पत्र और नकद इनाम देकर प्रोत्साहित किया।
एसएसपी ने चालान समय पर कोर्ट में पेश करने पर दी हिदायत
इस अवसर पर एसएसपी ने कहा कि कानून का सही क्रियान्वयन तभी संभव है जब विवेचना मजबूत, निष्पक्ष और तकनीकी रूप से सुदृढ़ हो। उन्होंने जोर दिया कि दुर्ग पुलिस ने सटीक साक्ष्य और ईमानदार जांच से अपराधियों को सजा दिलाने में सफलता पाई है।
एसएसपी ने सभी जांच को भविष्य में ई-साक्ष्य, डिजिटल एविडेंस और तकनीकी साधनों का बेहतर उपयोग करने के निर्देश दिए। उन्होंने यह भी सुनिश्चित करने को कहा कि प्रत्येक प्रकरण में सभी पहलुओं की गहराई से जांच कर 60 से 90 दिनों की निर्धारित अवधि में चालान कोर्ट में प्रस्तुत किया जाए। जिले में दर्ज हत्या के मामलों में कोर्ट ने कठोर फैसले सुनाए हैं।
थाना नंदिनी नगर के एक मामले में आरोपी सूर्यकांत वर्मा को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत आजीवन कारावास और 1000 रुपये के अर्थदंड से दंडित किया गया।
थाना दुर्ग के एक अन्य हत्या प्रकरण में राकेश साहू और अन्य आरोपियों को धारा 302/34 के तहत आजीवन कारावास तथा धारा 307/34 के तहत 7 वर्ष का कारावास दिया गया।
पॉक्सो, बलात्कार और अपहरण मामलों में कोर्ट ने सुनाई कठोर सजा
थाना कुम्हारी के मामले में मनप्रीत सिंह और गायत्री साहू को सामूहिक रूप से उम्रकैद और अर्थदंड से दंडित किया गया। वहीं, मोहन नगर में आरोपी विनय प्रताप ठाकुर उर्फ ईशु और थाना पुलगांव में शुभम रजक उर्फ सन्नी रजक को हत्या के साथ आर्म्स एक्ट के तहत भी अलग-अलग सजा सुनाई गई।
हत्या के प्रयास के मामलों में भी कोर्ट ने सख्ती दिखाई। पदमनाभपुर थाना क्षेत्र में चंद्रशेखर यादव उर्फ चिंटू को तीन मामलों में 7-7 वर्ष की सश्रम कारावास की सजा दी गई, जबकि पुलगांव में अशोक पारधी (सिसोदिया) को 10 साल सश्रम कारावास की सजा सुनाई गई। अन्य मामलों में दोषियों को 1 से 10 वर्ष तक की सजा दी गई।