कोरोना वैक्सीन की पहली डोज के बाद कितना कम हो जाता है संक्रमित होने का खतरा? स्टडी में हुआ खुलासा

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कोरोना वायरस महामारी की दूसरी लहर ने दुनिया को एक बार फिर परेशान किया हुआ है. वायरस से बचाव के लिए दुनियाभर के देश टीकाकरण के प्रयासों में तेजी ला रहे हैं. साथ ही लोगों से अपील की जा रही है कि वह जल्द से जल्द वैक्सीन लगवाएं ताकि वायरस के खतरे को कम किया जा सके. अब ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने बताया है कि वैक्सीन की पहली डोज लगने के बाद खतरा कितना हद तक कम हो जाता है. इसे लेकर आंकड़े जारी किए गए हैं.

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वैज्ञानिकों ने अतिरिक्त आंकड़े जारी किए हैं. इन आंकड़ो से पुष्टि होती है कि फाइजर-बायोएनटेक और एस्ट्राजेनेका दोनों कंपनियों द्वारा विकसित कोविड-19 वैक्सीन की पहली डोज लेने के बाद ही संक्रमण का खतरा काफी हद तक कम हो जाता है.

अध्ययनकर्ताओं ने शुक्रवार को प्रकाशित अपने अनुसंधान में कहा है कि कोरोना वायरस संक्रमण के खतरे को कम करने की क्षमता को लेकर वैक्सीन में कुछ खास अंतर नहीं है. यह अध्ययन अभी तक किसी प्रतिष्ठित समीक्षा पत्रिका में प्रकाशित नहीं हुआ है.

65 प्रतिशत तक कम खतरा

अध्ययन दिसंबर से अप्रैल के बीच इंग्लैंड और वेल्स में 3,70,000 से ज्यादा लोगों की नाक और गले के स्वाब के नमूनों के विश्लेषण पर आधारित है. वैज्ञानिकों का कहना है कि फाइजर-बायोएनटेक या एस्ट्राजेनेका दोनों में से किसी भी वैक्सीन का पहली डोज लगवाने के तीन सप्ताह बाद लोगों में कोरोना वायरस संक्रमण का खतरा 65 प्रतिशत तक कम हो गया है. वहीं दूसरी डोज लेने के बाद खतरा और भी काफी कम हो गया, साथ ही यह वैक्सीन सबसे पहले ब्रिटेन में पहचाने गए वायरस के नए स्वरूप के खिलाफ भी प्रभावी है.

बचाव के उपाय जरूरी

ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय (Oxford University) के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉक्टर कोएन पॉवेल्स ने कहा कि कुछ उदाहरण हैं, जहां वैक्सीन लगने के बाद भी उस व्यक्ति को संक्रमण हो गया है और वैक्सीन लगवा चुके लोगों से भी सीमित संख्या में संक्रमण फैलने की भी घटना हुई है. पॉवेल्स ने एक बयान में कहा, ‘इससे स्पष्ट है कि लोगों को संक्रमण फैलने के खतरे को कम करने के लिए प्रोटोकॉल का पालन करना चाहिए, मास्क लगाएं और दो गज की दूरी बनाए रखें.’