CAPF ने कहा अर्धसैनिक कल्याण बोर्ड का हों गठन , राज्यपाल को तीन सूत्री मांग का सौंपा ज्ञापन…

Chhattisgarh Crimes

रायपुर। कंफेडरेशन ऑफ एक्स पैरामिलिट्री फोर्स वेलफेयर एसोसिएशन ( CAPF ) ने अपनी तीन सूत्री मांगों को लेकर आज राजधानी रायपुर में राज्यपाल अनुसुइया उइके से भेंट कर रिटायर्ड पैरामिलिट्री जवानों की समस्या पर चर्चा कर एक ज्ञापन सौंपा है। अपनी मांगो के संबंध में जानकारी देते हुए महासचिव रणबीर सिंह ने बताया कि पिछले 15-17 सालों से चले आ रहे नक्सलवाद के कारण सैकड़ों पैरामिलिट्री जवान, स्थानीय पुलिस फोर्स के जवान व आम नागरिक शहीद हो गए।

राज्यपाल महोदया को ध्यान दिलाया कि अक्सर पुलिस फोर्स के जवान शहीद होते रहते हैं लेकिन कल्याण के नाम पर अभी बहुत कुछ किया जाना बाकी है। हम उन केंद्रीय सुरक्षा बलों की बात कर रहे हैं जो परमाणु ऊर्जा संयंत्रों, बंदरगाहों, हवाई अड्डो, संसद भवन, राज्यों में कानून व्यवस्था बनाए रखने व देश की लम्बी सरहदों की चाक-चौबंद चौकीदारी के अलावा देश में अचानक आने वाली प्राकृतिक विपदाओं में आम जान-माल की सुरक्षा कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि हमनें राज्यपाल महोदया से राज्य में स्थाई रूप से निवास कर रहे हजारों सेवारत, सेवानिवृत पैरामिलिट्री परिवारों वास्ते प्रदेश में अर्धसेनिक कल्याण बोर्ड की स्थापना किए जानें पर उनका ध्यान खींचा ताकि विधवाओं, विरांगनाओं, शहीद परिवारों एवं सेवानिवृत जवानों के पैंशन, पुनर्वास एवं कल्याणकारी योजनाओं को अमली जामा पहनाया जा सके।

श्री सिंह ने बताया कि दुसरा महत्वपूर्ण मुद्दा शहीद परिवारों को मिलने वाली सम्मान राशि को बढ़ाकर 1 करोड़ किए जाने की मांग की ताकि जिन मांओं के लाल बिछड़ गए, विरांगनाओं के सुहाग उजड़ गए उनके बच्चों के बेहतर शिक्षा-स्वास्थ्य एवं पुनर्वास में उपरोक्त सम्मान राशि जीने का सहारा बनें। उन्होंने रोष जताया कि सरकारें मैडल जीतने वाले खिलाड़ी को 4 से 6 करोड़ की सम्मान राशि दे रहे हैं जबकि देश के लिए अपना सर्वस्व बलिदान करने वाले जवानों के लिए इस तरह की शहीद सम्मान राशि का प्रावधान किया जाना चाहिए। सौंपे गए ज्ञापन में तीसरा मुद्दा 23 नवंबर 2012 को गृह मंत्रालय भारत सरकार द्वारा आफिस मेमोरेंडम जारी किया गया जिसमें सेना की तर्ज पर अर्धसैनिक बलों के जवानों को भी एक्स-मैन का दर्जा देने हेतु आदेश जारी किया गया था परंतु उपरोक्त आदेश को छत्तीसगढ़ राज्य में अभी तक लागू नहीं किया गया है इसे शीघ्र लागू किए जाने की आवश्यकता है ताकि रिटायर्ड पैरामिलिट्री जवानों को पुनर्वास व सरकारी नौकरियों में लाभ मिल सके।

श्री सिंह ने बताया कि राज्यपाल महोदया ने हमारी बातों को गंभीरता से सुना और सुरक्षा बलों की भूरी भूरी प्रशंसा करते हुए कहा कि राज्यों में शांति स्थापित करने व कानून व्यवस्था बनाए रखने में सर्वोच्च कार्यपराणयता का छत्तीसगढ़ हीं नहीं बल्कि पुरा राष्ट्र ऋणी है। साथ ही प्रतिनिधि मंडल को भरोसा दिलाया कि उपरोक्त जायज़ मांगों को सिफारिश के साथ मुख्यमंत्री व गृह मंत्रालय को अग्रिम कार्रवाई हेतु भेजेंगे। इस मौके पर पुर्व अर्धसैनिक प्रमोद कुमार शुक्ला, सुमित वर्मा, भुवन सिंह व जग सिंह शामिल थे।